वृंदावन। तमिलनाडु एवं पुदुचेरी से आए लगभग 50 छात्र-छात्राओं के प्रतिनिधिमंडल ने गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी का भ्रमण कर यहां संचालित सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं रासलीला संबंधी गतिविधियों को जाना। यह प्रतिनिधिमंडल जीएलए विश्वविद्यालय में विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के सहयोग से 1 से 10 जून तक आयोजित इंटर्नशिप कार्यक्रम के अंतर्गत मथुरा प्रवास पर है।
गीता शोध संस्थान में आयोजित संगोष्ठी में दक्षिण भारत से आए विद्यार्थियों को ब्रज संस्कृति, परंपराओं, कला, शिल्प एवं सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया गया। गीता शोध संस्थान के संयोजक चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार ने संस्थान द्वारा संचालित रासलीला प्रशिक्षण, मंचन तथा गीता प्रचार-प्रसार से संबंधित गतिविधियों की तमिल भाषा में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु और ब्रज का सांस्कृतिक संबंध अत्यंत प्राचीन एवं गहरा है। उन्होंने उल्लेख किया कि मथुरा की सांसद एवं प्रसिद्ध कलाकार हेमा मालिनी भी दक्षिण भारत से हैं। ब्रज संस्कृति के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि पुदुचेरी के अरविंदो आश्रम की शिक्षा एवं जीवन दर्शन से भी मथुरा के विद्यार्थी जुड़ रहे हैं।
उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद के ब्रज संस्कृति विशेषज्ञ डाक्टर उमेश चंद्र शर्मा ने ब्रज के मंदिरों की दर्शन परंपरा एवं मंदिरों के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। गीता विशेषज्ञ डॉक्टर महेश चंद्र शर्मा ने गीता के वैश्विक एवं राष्ट्रीय महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारतीय संविधान की मूल भावना भी गीता के सिद्धांतों से प्रेरित है। भारत रत्न राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन के सुपौत्र व वैज्ञानिक डॉक्टर शांति भूषण त्रिपाठी ने भी गीता के आध्यात्मिक एवं सामाजिक महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। जीएलए विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा के कोऑर्डिनेटर डॉ. अभिनव तिवारी ने विश्वविद्यालय में शुरू हुए प्रशिक्षण की जानकारी दी। इस अवसर पर जीएलए विश्वविद्यालय के प्रवक्ता विजय मिश्रा, रमाकांत राय, पारितोष भट्ट, अनिल दुबे आदि विद्वान उपस्थित रहे।