जवाहर बाग में 400 से अधिक नौजवानों को नक्सलियों के समान हथियारों की ट्रेनिंग दी जा चुकी थी। रामवृक्ष और उसके दस ट्रेनर उनको मानसिक और शारीरिक रूप से लड़ाई के लिए तैयार कर रहे थे। बच्चों को भी लाठी-डंडे चलाने की ट्रेनिंग दी जा रही थी।
गुरुवार को मीडिया से मुखातिब एसएसपी बबलू कुमार ने चंदनबोस से पूछताछ में सामने आए कुछ तथ्यों से अवगत कराया।
उन्होंने बताया कि पूछताछ में सामने आया है कि रामवृक्ष यादव ने एक कमेटी बना रखी थी। इसमें रामवृक्ष यादव खुद अध्यक्ष था, चंदनबोस उपाध्यक्ष, राकेश गुप्ता सचिव, हरनाथ सिंह और वीरेश यादव प्रमुख सदस्य थे। इनको ही खरीदारी, साफ-सफाई और अन्य जिम्मेदारियां दी गई थीं।
उन्होंने बताया कि चंदनबोस से पूछताछ में कई खुलासे हुए हैं। पता चला है कि बदायूं निवासी वीरेश यादव कब्जाधारियों को लाठी-डंडा, तमंचा चलाने और बम बनाने की ट्रेनिंग देता था। बच्चों को भी लाठी-डंडा चलाना सिखाया जाता।
रामवृक्ष जेल में बंद लोगों की जमानत कराने, अधिवक्ताओं से मिलने, तारीख पर जाने, जमानतियों का इंतजाम करने का कार्य करता था। वह अपने संपर्क में आए लोगों को आजाद हिंद सरकार से जोड़ने का काम भी करता था। राकेश गुप्ता और हरनाथ सिंह पर आर्थिक मददगारों से जुड़े रहने की जिम्मेदारी थी। नए-नए तरीकों से दान और चंदा जुटाया जाता। लोगों को बाबा जयगुरुदेव के नाम पर भी दान और चंदे के लिए तैयार किया जाता था।
राकेश गुप्ता लाया था हथियार
बदायूं के राकेश गुप्ता ने रामवृक्ष के संगठन को 10 लाख रुपये दिए थे। बदायूं में अपनी संपत्ति को भी आजाद हिंद सरकार के लिए दे दिया था। ये संपत्ति करोड़ों रुपये की बताई जाती है। वह अपने संपर्क में आए लोगों को रामवृक्ष को जोड़ने का कार्य भी करता था। उनसे चंदा वसूली और बाबा जयगुरुदेव के नाम पर दान राशि लेता। वह जब जवाहर बाग में आया तो अपने साथ लाइसेेंसी राइफल और कुछ अन्य हथियार भी लाया। पुलिस से तनाव बढ़ने पर वो अपनी इनोवा गाड़ी में करीब सौ हथियारों की खेप भी लेकर आया था।
आर्थिक मददगारों की बनाई जा रही कुंडली
चंदनबोस ने रामवृक्ष को हर माह आर्थिक मदद करने वालोें के नाम भी पुलिस को बताए हैं। ऐसे दस प्रमुख मददगार मिले हैं। इन लोगों ने 10 लाख से अधिक की राशि की मदद आजाद हिंद सरकार को की थी। पुलिस ने जवाहर बाग से मिले रजिस्टर के नामों की भी चंदनबोस से पुष्टि कराई है।
राकेश, वीरेश की तलाश में चार टीमें दे रहीं दबिश
जवाहर बाग में दो जून को हुई हिंसा के बाद फरार बदायूं के राकेश गुप्ता और वीरेश यादव की गिरफ्तारी के लिए मथुरा पुलिस की चार विशेष टीम दबिश दे रही हैं। इन टीमों ने एसटीएफ और एटीएस के साथ भी कोआर्डिनेशन किया हुआ है। एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि जवाहर बाग में जो वाहन जले हैं उनके चेसिस और इंजन नंबर से असली मालिकों का पता लगाया जा रहा है।
50 से अधिक लोगों ने पेड़ों से चलाईं थी गोलियां
चंदनबोस ने पूछताछ में खुलासा किया है कि आपरेशन जवाहर बाग के दिन रामवृक्ष के कहने पर जगह-जगह लोगों की टोली बना दी गई थी। 50 से अधिक लोग वृक्षों पर तमंचे और अन्य हथियार लेकर चढ़ गए थे। पुलिस के जवाहर बाग में घुसने पर पहले पथराव और लाठी-डंडों से हमला किया गया। बाद में चारों ओर से गोलियां चलाई गईं। वीरेश यादव, हरनाथ सिंह सहित 10 लोग टोलियों का नेतृत्व कर रहे थे।
गिरफ्तार लोगों का हो रहा सत्यापन
जवाहर बाग में पकड़े गए 267 लोगों की पुलिस की ओर से सत्यापन कराया जा रहा है। जेल में बंद कब्जाधारियों के बताए नाम और पते की संबंधित जनपदों से सत्यापन रिपोर्ट मांगी गई है।
रिटायर फौजी भी रामवृक्ष की टीम में
जवाहर बाग में पुलिस को तलाशी में एक सैनिक का कार्ड भी मिला था। चंदनबोस से इस बारे में पूछताछ की तो उसने बताया कि एक रिटायर्ड फौजी भी आजाद सिंह सरकार में सदस्य था। वह भी हथियार चलाने से लेकर अन्य गतिविधियों में शामिल रहता था।