शहर में यमुना किनारे विश्रामघाट के निकटवर्ती गताश्रम टीला पर बने मकानों में दरारें आने ने यहां के निवासी भयभीत हैं। इन्हें अनहोनी का भय सता रहा है। एक पखवाडे़ पहले गताश्रम टीला क्षेत्र की ककोरन घाटी में जमीन धंसने से करीब 36 मकानों में दरारें आ गईं।
इसमें करीब छह मकानों की हालत ज्यादा खराब हो गई। कई मकानों की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें हैं। इन्हें देखकर इनमें रहने वाले लोग भयभीत रहते हैं। पुराने मकानों की हालत ज्यादा खराब है। इनकी मरम्मत की उम्मीद भी नहीं है। यहां सबसे ज्यादा खराब स्थिति प्रवीन चतुर्वेदी, भोलेश्वर चतुर्वेदी, रज्जन अग्रवाल के मकान की है। गुड्डू, नरेंद्र सरदार, नीरज, सुनील चतुर्वेदी के मकान भी इसकी चपेट में हैं। कई मकानों की दीवारे एक-दूसरे पर टिक गई हैं।
लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में मकानों में दरार आने का मुख्य कारण आमतौर पर पानी और सीवर की पाइप लाइनों में लीकेज होना है। अनिल चतुर्वेदी ने बताया कि यह समस्या बहुत पुरानी है। पिछले दिनों एक बार फिर मकानों में दरारें आ गईं। इससे बड़ी संख्या में मकान प्रभावित हुए हैं।
एक पखवाडे़ पहले मकानों में दरार आई थीं। इस सप्ताह एक बार फिर यह दरारें बढ़ गईं। पालिका के इंजीनियर्स ने दौरा किया है। समस्या का समाधान खोजने की कोशिश हो रही है।
- गिर्राजधरण चतुर्वेदी, सभासद