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Mathura News: जिले में 34,522 बुजुर्ग मतदाता, घर बैठे 116 ने डाले वोट

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मथुरा। जिले में 80 वर्ष से ऊपर के मतदाताओं ने पहली बार घर बैठे वोट डालने में खास रुचि नहीं दिखाई। हालांकि बीएलओ भी बुजुर्ग मतदाताओं तक पहुंच बनाने में सफल नहीं हो पाए। जिले में 80 वर्ष से ऊपर के 34,522 मतदाता हैं, लेकिन केवल 116 बुजुर्गों ने ही घर बैठे वोट डाले हैं।
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भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर जिले में 80 वर्ष से ऊपर के मतदाताओं को घर बैठे मतदान की सुविधा दी गई है। इस प्रकार की नई मतदान प्रक्रिया 19 और 20 अप्रैल को पूरी की गई। इस नई मतदान प्रक्रिया के लिए मतदान पार्टियों ने बुजुर्ग मतदाताओं से संपर्क किया और अपने साथ लेकर गए बैलेट बॉक्स में बुजर्गों के वोट डलवाए। जिले में कुल आठ मतदान पार्टियों को नई मतदान प्रक्रिया कराने के लिए भेजा गया था।

इसके लिए छाता तहसील क्षेत्र में एक, गोवर्धन तहसील क्षेत्र में एक, बलदेव तहसील क्षेत्र में दो, मथुरा तहसील क्षेत्र में दो और मांट तहसील क्षेत्र में दो मतदान पार्टियों को लगाया गया था। मतदान पार्टियों ने उन बुजर्गों से वोट डलवाए, जिनके 12-डी फार्म भरवाए गए। संवाद
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कई क्षेत्रों तक नहीं पहुंचे बीएलओ

बुजुर्ग मतदाताओं के कम मतदान का एक बड़ा कारण रहा है। डैंपियर नगर निवासी कुसमाकर लाल अग्रवाल और उनकी पत्नी सरस्वती देवी दोनों ही 85 साल से ज्यादा के हैं। कुसमाकर अग्रवाल तो चल फिर भी रहे हैं, लेकिन पत्नी सरस्वती देवी बीमार होने के कारण बिस्तर में ही पड़ी रहती हैं। इनके घर किसी ने संपर्क नहीं किया। दूसरी ओर चंदनवन फेस टू में शांतिदेवी भार्गव भाग संख्या 85 की मतदाता प्रेमवती शारीरिक रूप से अक्षम हैं, लेकिन इनके यहां कोई बीएलओ नहीं पहुंचा।







80 वर्ष से ऊपर के जिन बुजुर्गों के 12-डी फार्म दिए गए, उनके वोट मतदान पार्टियों ने डलवाए। कई ऐसे बुजुर्ग भी थे, जिन्होंने फार्म तो भरकर दिया, लेकिन मतदान पार्टियों के पहुंचने पर घर पर नहीं मिले। कई बुजुर्गों ने मतदान केंद्र पर ही आकर मतदान करने के लिए कहा।

- प्रीति जैन, सहायक निर्वाचन अधिकारी





जिले में बुजुर्ग मतदाता की संख्या

80 से 89 वर्ष तक- 29252

90 से 99 वर्ष तक- 4910

100 से 109 वर्ष तक- 352

110 से 119 वर्ष तक- 4

120 से 129 वर्ष तक- 4



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राधा आर्चिड सरस्वती कुंड निवासी बुजुर्ग मतदाता कन्हैयालाल बजाज कहते हैं कि वह जमाना बखूबी याद है, जब बैलेट पेपर से वोट डालते थे। अब जमाना बदल गया है और ईवीएम से वोट डालने में भी कोई परेशानी नहीं है।






गुरुनानक नगर सौंख अड्डा निवासी बुजुर्ग मतदाता प्रो. डाॅ. केएमएल अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने पहला वोट 1960 के चुनाव में डाला था, जब मतदान के प्रति जागरूकता नहीं होती थी। उस समय लोग वोट की कीमत नहीं जानते थे।





रांची बांगर निवासी वयोवृद्ध मतदाता किशनी कहती हैं कि वह मतदान केंद्र पर ही जाकर मतदान करेंगी। घर से वोट डालने की सुविधा हुई है तो मतदान केंद्र पर वोट डालने की अलग ही बात है।


गोवर्धन निवासी फुलनिया का कहना है कि वह मतदान केंद्र तक जाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। घर बैठे वोट डालने की सुविधा ऐसे बुजुर्गों के लिए ठीक है, जिनकी हालत ठीक नहीं है।
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