वृंदावन। दिल्ली से लेकर आगरा तक ६ लेन में तब्दील नेशनल हाइवे चौड़ीकरण में शिफ्ट कर तेहरा और फरह के जंगलों में लगाए गए सैकड़ों वृक्ष सूख गए हैं। उचित देखभाल और खाद पानी न मिलने से इनकी यह हालत हुई है। इनकी देखभाल की जिम्मेदारी निजी कंपनी की थी।
वर्ष २०१५ से मथुरा की सीमा में शुरू हुए नेशनल हाइवे के चौड़ीकरण के दौरान शुरुआत में सैकड़ों वृक्षों को काट दिया गया। वन विभाग ने वन संपदा को बचाने के प्रयास शुरू किए और पेड़ों को कटान रोककर ट्रांसप्लांट कराने पर विचार हुआ।
केंद्र और राज्य सरकार से अनुमति मिलने के बाद वन विभाग ने गाजियाबाद की निजी एजेंसी रोहित नर्सरी को छाता से लेकर छटीकरा के बीच लगभग २५५ वृक्षों को नई तकनीक के सहारे (ट्रांसप्लांट) प्रत्यारोपण कर १५१ वृद्धास फरह के जंगल में और १०४ वृक्षों को मथुरा मार्ग पर तेहरा के जंगलों में शिफ्ट करने का ठेका दिया। इस योजना में गूलर, पापड़ी, पीपल, बरगद, नीम, जामुन, सीसम के साथ-साथ कदंब के वृक्षों को ट्रांसप्लांट किया गया।
लेकिन उचित देखभाल और खाद पानी न मिलने से अधिकांश पेड़ सूख गए हैं। निजी कंपनी से हुए तय अनुबंध में लगभग डेढ़ वर्ष तक पेड़ों को मीठे पानी से सींचने और खाद आदि देकर उन्हे जीवन दिया जाना था लेकिन कंपनी ने अपना कार्य संतोषजनक नहीं किया।
जिस कंपनी को इन पेड़ों का ट्रांसप्लांट करने का ठेका दिया गया था, उसने अपना कार्य ईमानदारी से नहीं किया। लापरवाही के कारण सभी पेड़ सूख गए।
ओम प्रकाश शर्मा, सेक्शन ऑफीसर वन विभाग
खारे पानी से नष्ट हो रही वन संपदा
पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए वृंदावन विकास योजना में सड़क चौड़ीकरण में काटे गए वृक्षों के स्थान पर नए वृक्षारोपण के लिए वन विभाग की ओर से 2012 से लेकर 2020 के बीच सुनरख वन ब्लॉक में लगभग १२५००, छटीकरा-वृंदावन मार्ग पर १९५०, रूक्मणी विहार में २ हजार, मथुरा वृंदावन मार्ग पर १ हजार, वृंदावन परिक्रमा मार्ग में पांच सौ वृक्ष लगाए जाने थे लेकिन पानी के अभाव में अधिकांश वन संपदा सूख गई।
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