ओलावृष्टि से प्रभावित जिले में आज भी 229 गांव के किसान मुआवजा राशि का इंतजार कर रहे हैं। यह संख्या तो उन गांवों की है जहां अब तक एक रुपया भी नहीं दिया गया है। बाकी गांवों में आधी-अधूरी स्थिति है। जिले को आज भी मुआवजा वितरण के लिए 208 करोड़ रुपये से ज्यादा राशि की जरूरत है।
ओलावृष्टि और बेमौसम बरसात से बर्बाद हुई रबी की फसल से प्रभावित करीब 5.5 लाख किसानों के लिए जिला प्रशासन ने शासन से 390.34 करोड़ की डिमांड की थी। यह डिमांड केंद्र सरकार द्वारा नए सिरे से तय किए गए मुआवजे के अनुरूप भेजी गई। इस राशि से 2.19 लाख हेक्टेयर प्रभावित फसल के मालिक किसानों को मुआवजा दिया जाना था।
इसमें 177612 हेक्टेयर जमीन लघु और सीमांत किसानों की है। 42205 हेक्टेयर जमीन बड़े किसानों की है।
जिला प्रशासन के स्तर से भेजी गई डिमांड के अनुरूप अब तक शासन से सिर्फ 182 करोड़ रुपये ही भेजे हैं। इनमें से 178 करोड़ का वितरण करीब 2.5 लाख किसानों को जिला प्रशासन कर चुका है। बाकी के लिए अभी भी जनपद को 208 करोड़ रुपये की जरूरत है।
लेकिन, जिला प्रशासन की निरंतर डिमांड के बाद भी लंबे समय से शासन से कोई राशि नहीं मिली है। जिले में 229 गांव तो ऐसे हैं जहां अब तक कोई राशि वितरित नहीं हुई है। 663 गांवों में कहीं पूरा तो कहीं आंशिक मुआवजा मिला है। इससे आए दिन किसान कलक्ट्रेट पर अफसरों से मिल रहे हैं या प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों की चिंता है कि कहीं वे मुआवजे से वंचित न रह जाएं।
आंकड़े -
डिमांड- 390.34 करोड़
शासन ने अवमुक्त राशि- 182 करोड़
जरूरत- 208 करोड़
कुल प्रभावित गांव- 892
मुआवजा मिला- 663 गांव
वंचित - 229 गांव
कुल किसान - 5.5 लाख
प्रभावित फसल - 2.19 लाख हेक्टेयर