फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mathura News: संस्कृति विवि में दीक्षांत समारोह में 2045 विद्यार्थियों को मिली डिग्री

विज्ञापन
संस्कृति विवि के छठवें दीक्षांत समारोह में पीएचडी की उपाधि से सम्मानित शोधार्थी।
विज्ञापन
मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय का छठवां दीक्षांत समारोह संतों के सानिध्य में भव्य और दिव्य वातावरण में संपन्न हुआ। विद्यार्थियों के अथक परिश्रम के परिणाम स्वरूप प्राप्त फल के रूप में उनको पदक और उपाधियां प्रदान की गईं। मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और राष्ट्रीयगान की परंपरा को पूर्ण करते हुए दीक्षांत समारोह का शुभारंभ हुआ। समारोह में संस्कृति विवि के कुलाधिपति डा. सचिन गुप्ता द्वारा आकाश इंस्टीट्यूट के संस्थापक, न्यूमरोलॉजिस्ट डा. जेसी चौधरी और बालीवुड के अभिनेता, कवि आशुतोष राणा को मानद उपाधि से विभूषित किया। समारोह में लगभग 2045 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इसके साथ ही 22 को पीएचडी की डिग्री से विभूषित किया गया।
विज्ञापन

अभिनेता आशुतोष राणा ने कहा कि इंसान को सदैव आदि, व्याधि और उपाधि जैसी तीन से बचकर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि बाक़ी दोनों का इलाज हो सकता है पर उपाधि का घमंड अगर आ जाये तो उसका इलाज नहीं है। उन्होंने कहा कि वे विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डा. सचिन गुप्ता के आभारी हैं, जिन्होंने उन्हें इस उपाधि से नवाज़ा और वे ख़ुद को ख़ुशक़िस्मत मानते हैं कि उन्हें यह उपाधि संस्कृति विवि से मिली है।
मानद् उपाधि से सम्मानित डा.जेसी चौधरी ने कहा कि डिग्री मिलना आपकी शिक्षा का अंत नहीं है। यह सच है कि अभी तक आपने जो समय व्यतीत किया वो आपके जीवन का सबसे गोल्डन पीरियड था। असली जिंदगी की शुरुआत अब होगी, यह दीक्षा का अंत नहीं है। अभी तो ज़िंदगी शुरू हुई है। ज़िंदगी में जो मिल जाये उससे कभी भी संतुष्ट नहीं होना चाहिए और अपने लिए हमेशा बेहतर की तलाश करते रहना चाहिए।
विज्ञापन

संस्कृति विवि के कुलाधिपति डा. सचिन गुप्ता ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि आपको जीवन में कभी हार नहीं माननी है। हमारे सामने कैसी भी चुनौती आए, डटे रहना है। लगातार प्रयास करने से ही एक दिन सफलता मिलती है। विवि के कुलपति प्रो. एमबी चेट्टी ने कहा कि विवि को सबसे तेज गति से प्रगति करने वाली शिक्षा संस्था के रूप में आगे लेके जाने का है। विवि में विश्व स्तर की शिक्षा, 25 स्टार्टअप्स और अमेरिका एवं यूके के शिक्षण संस्थानों के साथ महत्वपूर्ण एमओयू साइन हुए हैं।
कानपुर आईआईटी डॉ. नलिनाक्ष एसव्यास ने कहा कि यह दीक्षा का अंत नहीं है, यह तो शिक्षा की शुरुआत है। बस अब आपको ज़िंदगी सिखाएगी। शिक्षा प्रणाली और एआई के उपयोग के बारे में भी छात्रों को बताया। एआईयू के चेयरमैन विनय कुमार पाठक ने बताया कि अध्यापक, अभिभावक और छात्र तीनों छात्र की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। शिक्षा का कोई अंत नहीं होता और दीक्षा जीवन जीने का तरीका है। दीक्षा का प्रयोजन पुरातन है। छठे दीक्षांत समारोह की शुरुआत शैक्षणिक प्रोसेशन से हुई। आगे-आगे चल रहे एनसीसी कैडेट और गुरुकुल के विद्यार्थी इस प्रोसेशन को एक अलौकिक स्वरूप प्रदान कर रहे थे। छात्र कल्याण डीन डॉ धर्मेंद्र एस तोमर ने कार्यक्रम में सभी अध्यापकों, छात्रों एवं अभिभावकों का स्वागत किया।
कुलाधिपति डा. सचिन गुप्ता ने मंच पर आसीन आशुतोष राणा, अनन्तश्री विभूषित जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी सतीशाचार्य महाराज, महामंडलेश्वर हेमांगी सखी मां, पूज्य चिन्मयानंद बापू, शारदा सर्वज्ञ पीठाधीश्वर अनंतश्री स्वामी अमृतानंद देवतीर्थ, आचार्य मनीष, डॉ. जेसी चौधरी, सुदीप गोयंका, प्रोफेसर विनय कुमार पाठक, राजेश गुप्ता, मुकेश गुप्त, डॉ. एमबी चेट्टी, सीईओ विवि डॉ. मीनाक्षी शर्मा का पटुका ओढ़ाकर एवं स्मृतिचिह्न देकर सम्मान किया गया। संचालन ज्योति यादव एवं विकास कौशिक ने किया।

22 को मिली पीएचडी की डिग्री
कुलपति प्रो. एमबी चेट्टी ने बताया कि 22 पीएचडी की उपाधि वाले छात्रों को मंच पर आमंत्रित किया और सभी अतिथियों ने मिलकर उनको उपाधि से नवाज़ा। उसके बाद मास्टर्स वाले 232 छात्रों, उनके बाद 1277 बैचलर्स और 515 डिप्लोमा वाले छात्रों को उनकी उपाधि प्रदान की गई और उन्हें शपथ दिलवायी गई। विशेष दक्षता हासिल करने वाले 45 विद्यार्थियों को स्वर्ण, 44 को रजत और 39 विद्यार्थियों को कांस्य पदक देकर सम्मानित किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें