मथुरा पुलिस के मुताबिक, इन गांवों में राजस्थान की सीमा से सटे गोवर्धन थाने के गांव देवसेरस, मुड़सेरस, नगला अकातिया, दौलतपुर, मडौरा, मलसराय, भगौसा, कामा रोड, थाना बरसाना में हाथिया, उगला जानू, कोसीकलां थाने में शाहपुर, उटाबर, शेरगढ़ में बिसंभरा, गुलालपुर, बाबूगढ़ सहित 18 गांव रेड जोन में शामिल हैं।
इनमें रहने वाले लोग पहले टटलू बनकर सोने की ईंट के नाम ठगी करते थे। इसके बाद जेवर साफ कराने के बहाने सोना निकालने के साथ ही नौकरी, ऑनलाइन लाटरी के नाम पर ठगी करने लगे। अब यह पूरी तरह साइबर अपराध की ओर मुड़ गए हैं। भरतपुर और हरियाणा में भी इनकी रिश्तेदारियां हैं। भरतपुर के कई गांव भी अब रेड जोन में आ चुके हैं। यह लोग ठगी करके दूसरे राज्यों में छुप जाते हैं। वहां के अपराधियों को यह लोग अपने यहां शरण देते हैं। यही कारण है कि पुलिस इन्हें आसानी से नहीं पकड़ पाती है।
ठगी के लिए लेते हैं किराये पर बैंक खाते
इस गैंग के लोग साइबर ठगी की रकम भेजने के लिए कमजोर तबके के लोगों को मामूली रकम देकर उनके दस्तावेजों के आधार पर बैंकों में खाते खुलवाकर इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को ट्रांसफर करने के लिए करते हैं। मथुरा में पिछले दिनों किराये के खातेदार सामने आए थे। इसमें साइबर थाने में मथुरा के 15 युवकों के नाम मामला भी दर्ज किया गया था। इनमें दो लोगों को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया था। एसएसपी बताते हैं कि म्यूल या किराये के खाताधारकों का भी अपना नेटवर्क है। यह नेटवर्क एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। यह लोग मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड के लोगों तक के खाते खुलवा लेते हैं।
युवकों को दी जाती है ठगी की ट्रेनिंग
गांवों में साइबर ठग बनने के लिए युवकों को ऑनलाइन गेमिंग, ऑनलाइन जॉब सहित अन्य तरीकों से लोगों को गुमराह करके ठगी करने की ट्रेनिंग दी जाती है। इन गांवों के उच्च शिक्षित नहीं हैं मगर वह ऑनलाइन ठगी करने के लिए अंग्रेजी भी सीखते हैं, ताकि किसी को भी गुमराह करके ठगी की जा सके। ठगी के लिए यह अलग-अलग तरीके इस्तेमाल करते हैं। इनके तार सऊदी अरब, नाइजीरिया सहित अन्य देशों में भी फैले हुए हैं।