चौमुंहा के बरौली गांव के स्कूल के कृमिनाशक दवा खाने वाले 11 बच्चों की तबियत बुधवार को फिर बिगड़ गई। इन सभी का स्वास्थ्य केंद्र पर उपचार किया गया। दो की हालत गंभीर होेने पर जिला अस्पताल भेजा गया है। सूचना पर एसडीएम गुलाब चंद और खंड शिक्षाधिकारी चंद्रभूषण ने अस्पताल पहुंचकर बच्चों की स्थिति देखी।
गौरतलब है कि ये वही बच्चे हैं जिनकी मंगलवार को कृमिनाशक दवा (एल्बेंडाजॉल) खाने से तबीयत खराब हुई थी। कल इनका उपचार करने के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया था। रात को फिर से इनकी तबीयत खराब हो गई। परिवारीजन इन्हें चौमुंहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर लेकर आए। यहां डा. संदीप सिंह के नेतृत्व में चिकित्सकों ने बच्चों का उपचार किया। चिकित्सक ने बताया कि नौ बच्चों को उपचार के बाद घर भेज दिया है। पूजा और सीमा को लगातार बुखार आने के चलते जिला अस्पताल भेजा गया है।
जिला अस्पताल के चिकित्सक डा. अनंत व्यास ने बताया कि दोनों छात्राओं को भर्ती कर लिया गया है। कुछ जांचें लिखीं गई हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही बुखार का कारण मालूम होगा।
औषधि विभाग ने लिए कृमिनाशक दवा के नमूने
कृमिनाशक दवा (एल्बेेंडाजॉल) खाने से मंगलवार को बड़ी संख्या में बच्चे बीमार होने के बाद बुधवार को औषधि विभाग की टीम सीएमओ कार्यालय के सीएमएसडी स्टोर पहुंची। यहां से इस दवा के दो नमूने लिए हैं। गुरुवार को ये टीम फरह के नगला चंद्रभान स्थित स्कूल जाएगी।
गौरतलब है कि मंगलवार को फरह के नगला चंद्रभान के स्कूल और चौमुंहा के बरौली गांव के स्कूल के बच्चे कृमिनाशक दवा खाकर बीमार हो गए थे। बुधवार को औषधि निरीक्षक दीपक कुमार ने सीएमओ कार्यालय के दवा स्टोर से वितरित की गई बैच नंबर एन 6219 की दवा के दो नमूने लेकर प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे हैं।
यहां प्रभारी एसीएमओ डा. सज्जन कुमार ने बताया कि फरह में जो दवा बांटी गई उसकी अभी 10500 गोलियां स्टॉक में हैं। इस पर औषधि निरीक्षक दीपक कुमार ने इस दवा का नमूना लेने तक वितरण नहीं करने की बात कही। इस अवसर पर चीफ फार्मासिस्ट सतीश राजपूत भी मौजूद थे।