मुरादाबाद में ट्रेन की जनरल बोगी में इलाज न मिलने से एक यात्री की हालत बिगड़ गई। उसे मुरादाबाद में उतार लिया गया। गरीब परिजनों ने उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन सोलह घंटे तक संघर्ष के बाद उसकी मौत हो गई।
गरीबी के चलते परिवार वाले शव को जिला अस्पताल परिसर में लेकर बैठे रहे। लोगों की मानवता जगी और उसके अंतिम संस्कार के लिए चंदा जुटाया गया। देर शाम लालबाग शमशान घाट पर संस्कार कर दिया गया।
रिक्शे पर हुई मौत
झारखंड के दुमका जिले में सिंदूरदी गांव निवासी हेमलाल (20) रोजगार के लिए जम्मू जा रहा था। उसके साथ सौतेला भाई नन्नूलाल व गांव के दूसरे लोग भी थे। रास्ते में हेमलाल को उल्टी-दस्त होने लगे। जनरल बोगी में उसे कोई इलाज नहीं मिल सका। शाम करीब छह बजे उसे मुरादाबाद स्टेशन पर उतार लिया गया।
नन्नूलाल अपने एक साथी पानेसर निवासी चोआयनी के साथ हेमलाल को लेकर उतर गया। रिक्शे वाले ने उसे हरपाल नगर स्थित एक डाक्टर की क्लीनिक पर उतार दिया। बुधवार को सुबह डाक्टर ने उनकी तबियत बिगड़ने की बात कहकर कहीं और ले जाने की सलाह दी।
नन्नू व पानेसर उसे रिक्शे से हेमलाल को जिला अस्पताल आ रहे थे। रास्ते में उसकी मौत हो गई। जिला अस्पताल में डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
चालकों ने किया अंतिम संस्कार
दोनों के पास इतने पैसे भी नहीं थे कि हेमलाल का अंतिम संस्कार कर सकें। इमरजेंसी के सामने पार्क में शव को रखकर दोनों सोच में पड़ गए। अस्पताल में आने वाला हर शख्स अफसोस तो जता रहा था लेकिन किसी ने मदद का हाथ नहीं उठाया।
अस्पताल में खड़ी होने वाले प्राइवेट एंबुलेंस के चालकों ने अंतिम संस्कार का बीड़ा उठाया। चंदे की रकम से देर शाम लालबाग स्थित शमशान घाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया।