यश भारती पुरस्कार पाकर खिला चेहरा
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सुप्रीम कोर्ट का आदेश सराहनीय है। इससे नई पीढ़ी और आम आदमी आत्मीयता से देश के साथ जुड़ेगा। इस संबंध में बहुत पहले ही आदेश हो जाना चाहिए था। यह प्रतिक्रिया है सिनेमाघरों में फिल्म से पहले राष्ट्रगान सुनाए जाने और तिरंगा दिखाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आम लोगों की।
शहर के मोहल्ला दरीबा में रहने वाले सनोज शर्मा का कहना है कि सुबह अखबारों में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बारे में पढ़ा तो काफी अच्छा लगा। नई पीढ़ी और आम लोगों में भी देशभक्ति की भावना होनी चाहिए। फील्मों और गेम्स में लीन रहने वाली पीढ़ी जब सबसे पहले राष्ट्रगान सुनेगी और तिरंगा देखेगी तो उसमें देशभक्ति की भावना जागृत होगी। वे लोग राष्ट्र और उसकी प्रगति के बारे में भी सोचेंगे।
वहीं आगरा रोड चौकी के सामने रहने वाले सचिन शर्मा भी सुप्रीम कोर्ट का आदेश सुनकर काफी खुश हैं। पूछने पर गर्व से सिर ऊंचा कर कहते हैं कि देशभक्ति और राष्ट्र प्रेम सबसे ऊपर होना चाहिए। इनका आदर भी करना चाहिए। फिल्म शुरू होने से पहले यदि राष्ट्रगान बजेगा तो आम आदमी के अंदर देशभक्ति की भावना जरूर जागृत होगी। यह निर्णय काफी अच्छा है। मोहल्ला कृष्णा नगर निवासी रविंद्र सिंह चौहान भी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का समर्थन करते हुए चहक उठते हैं। उनका कहना है कि यह आदेश अच्छा है लेकिन इसका पालन करने में कोई भी कोताही नहीं बरती जानी चाहिए। राष्ट्रगान का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए। इसके लिए कड़े नियम भी बनाए जाने चाहिए।
वहीं शिक्षा जगत से जुड़े राजपाल सिंह चौहान का कहना है कि वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सहमत नहीं है। इसके स्थान पर वंदेमातरण गीत को सिनेमा हाल में बजाया जाना चाहिए। क्योंकि यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन और भारतीय संस्कृति के अधिक नजदीक है।