अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर हाईकोर्ट में रिट डालना नगर पालिकाध्यक्ष को भारी पड़ गया। हाईकोर्ट ने उनकी रिट खारिज करने के साथ ही डीएम से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है। साथ ही शासन को भी इस संबंध में कार्रवाई के लिए लिखा है। इसके अलावा पालिका ईओ से भी रिपोर्ट तलब की है।
नगर पालिका में कुछ समय पहले तक जमुना प्रसाद जेई के पद पर तैनात थे। उनका तबादला रामपुर के लिए हो गया था। उन्होंने वहां पर ज्वाइनिंग नहीं की। बताया जाता है कि इसे लेकर पालिकाध्यक्ष साधना गुप्ता ने एक रिट हाईकोर्ट में डाली थी। इसमें उन्होंने जमुना प्रसाद के खिलाफ कहा कि वे नए तैनाती स्थल पर ज्वाइन नहीं कर रहे हैं। पिछले दिनों उक्त रिट को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट का कहना था कि आखिर पालिकाध्यक्ष ने अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर इस प्रकार की रिट क्यों डाली। इसको लेकर उन्होंने शासन के साथ ही डीएम और पालिका के ईओ को निर्देश जारी किए। साथ ही पूरे मामले की रिपोर्ट जांच कर 30 दिन के अंदर हाईकोर्ट में दाखिल करने की बात कही है। कोर्ट का निर्देश पत्र आते ही हड़कंप मच गया है।
इस संबंध में पालिकाध्यक्ष साधना गुप्ता का कहना है कि रिट खारिज होने के साथ ही कोर्ट ने जो आदेश जारी किए हैं उसको लेकर फिर से एक पिटीशन डाला गया है। उनका दावा है कि इसको लेकर उन्हें स्टे भी मिल गया है। वहीं ईओ रामपाल का कहना है कि उक्त प्रकरण से पालिका का कोई संबंध नहीं है। कोर्ट का पत्र आया है। इसका जवाब भेज दिया जाएगा। वहीं एडीएम राकेश कुमार मालपाणी का कहना है कि कोर्ट का पत्र मिला है। इसको लेकर जांच की जा रही है। वहीं ईओ और पालिकाध्यक्ष से अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है। फिलहाल कुछ भी हो लेकिन कोर्ट के रुख से स्थानीय प्रशासन से लेकर लखनऊ तक हड़कंप मचा हुआ है।