रामलीला मैदान में चल रही रामलीला के तहत बुधवार शाम राम-रावण युद्ध के बाद जैसे ही श्रीराम ने बाण चलाया वैसे ही 32 फुट का बना लंकापति रावण का पुतला जल उठा। इसके साथ ही कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले भी फूंके गए। वहीं जय श्रीराम के जयकारे चारों ओर गूंज उठे। रावण के पुतला दहन कार्यक्रम को देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग मौजूद थे।
बुधवार को श्रीरामलीला कमेटी द्वारा रामलीला मैदान में आयोजित रामलीला में देर शाम रावण वध और रावण के पुतला दहन को देखने के लिए नगर और क्षेत्र से हजारों की भीड़ उमड़ी। राम और रावण के बीच हुए युद्ध में राम-लक्ष्मण अपनी धनुर्विद्या का जौहर दिखाते हुए राक्षसी सेना को मौत के घाट उतारने लगे। राम और लक्ष्मण ने रावण पर कई बाण छोड़े, लेकिन रावण नहीं मरा। विभीषण ने रावण की नाभि में अमृत का भेद बताया तो राम ने अग्निवाण से उसकी नाभिकुंड के अमृत को सोख कर निरंतर वाणों की वर्षा कर उसे धराशाई कर दिया।
रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतलों का दहन देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा।
इस मौके पर कमेटी के अध्यक्ष महेशचंद्र अग्निहोत्री, सुरेशचंद्र गोयल, वीर सिंह भदौरिया, अशोक गुप्ता पप्पू, अनिल अग्रवाल, रमेश चंद्र सराफ, सुरेश चंद्र बंसल, घनश्यामदास गुप्ता, नरेंद्र कुमार शाह, गोपाल कृष्ण अग्रवाल, अमरनाथ भारद्वाज, नरेंद्र राठौर सहित कमेटी के समस्त पदाधिकारी मौजूद थे।
वहीं रात भावंत चौराहा, मदार दरवाजा, छपट्टी आदि स्थानों पर भी लोगों रावण के पुतले का दहन किया। आसपास शाम से ही मेले जैसा माहौल रहा।