मैनपुरी। कार्यस्थल पर प्रताड़ना के कारण शाखा डाकपाल निखिल वर्मा की खुदकुशी मामले में सुसाइड नोट का सच जानने के लिए तीन पन्नों का सुसाइड नोट पुलिस ने एफएसएल भेजा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद साफ हो जाएगा कि सुसाइड नोट निखिल ने ही लिखा था या हकीकत कुछ और है। बता दें कि तूल पकड़ रहे मामले में डाक अधीक्षक व पर्यवेक्षक निलंबित हो चुके हैं। चार पर्यवेक्षक अपने पद पर वापस किए गए हैं।
थाना बिछवां क्षेत्र के गांव राम नगर निवासी शाखा डाकपाल निखिल वर्मा बेवर के मुड़ई स्थित डाकघर में कार्यरत थे। बृहस्पतिवार को निखिल ने फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली थी। शव के पास ही पुलिस को एक रजिस्टर से सुसाइड नोट मिला था। जिसमें डाक अधीक्षक सुशील कुमार शुक्ला और पर्यवेक्षक श्याम मुरारी तिवारी पर वसूली व प्रताड़ित करने की बात कही गई थी। डाक अधीक्षक व पर्यवेक्षक को आत्महत्या का जिम्मेदार बताया था। मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद डाक कर्मियों ने भी प्रदर्शन कर कार्रवाई की मांग रखी।
जिसके बाद डाक अधीक्षक व पर्यवेक्षक को निलंबित कर दिया गया, वहीं चार अन्य पर्यवेक्षक को उनके मूल पद पर वापस भेजा गया। शनिवार को डीएम और एसपी ने भी रामनगर पहुंच कर मृतक परिजन से मुलाकात की और कार्रवाई का आश्वासन दिया था। मामले में प्रशासन किसी तरह की जल्दबाजी या लापरवाही नहीं करना चाहता, मिली जानकारी के अनुसार सुसाइड नोट की हकीकत जानने के लिए जांच के लिए एफएसएल आगरा भेजा गया है।
जांच रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट हो जाएगा कि सुसाइड नोट निखिल वर्मा ने ही लिखा था या लिखावट किसी साजिश का हिस्सा तो नहीं है। फिलहाल, सुसाइड नोट की जांच रिपोर्ट पुलिस के लिए अहम मानी जा रही है, वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मिल रहे संकेत पर भी पुलिस की जांच जारी है।