मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व सपा सुप्रीमो मुलायम
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गुरुवार शाम को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के प्रत्याशियों की सूची घोषित करने के बाद शुरू हुई कार्यकर्ताओं की पशोपेश की स्थिति शुक्रवार देर शाम सन्नाटे में बदल गई। अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव के निष्कास का समाचार आते ही जिला कार्यालय और जिले के सपाइयों में खामोशी छा गई। इसके बाद पार्टी के अधिकांश नेताओं के फोन स्विच आफ हो गए या फिर पिक ही नहीं हुए। वहीं जिलाध्यक्ष मानिक चंद यादव ने खुल कर कहा कि पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी वही है जिसे राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह ने जारी सूची में टिकट दिया है।
समाजवादी पार्टी में चाचा शिवपाल और भतीजे अखिलेश यादव के बीच चल रही जंग गुरुवार को उस समय और तेज हो गई जब अखिलेश ने प्रत्याशियों की एक अलग सूची मीडिया में जारी कर दी। इसके बाद तेजी से घटनाक्रम बदला। दिन में जहां सीएम की सूची में शामिल मैनपुरी, भोगांव और किशनी विधायकों के समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। वहीं अन्य कार्यकर्ता पशोपेश में पड़े रहे कि आखिर वे करें तो क्या। मुलायम सिंह यादव द्वारा जारी सूची के प्रत्याशियों का समर्थन करें या फिर अखिलेश की सूची के प्रत्याशियों का। पूरे दिन चली यह पशोपेश देर शाम सन्नाटे में उस समय बदल गई जब मुलायम सिंह यादव ने रामगोपाल यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। इसके बाद सपा कार्यालय से लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं तक के घरों पर सन्नाटा पसरा दिखा।
इस संबंध में जब भोगांव विधायक आलोक शाक्य और किशनी विधायक इंजीनियर ब्रजेश कठेरिया से वार्ता करने की कोशिश की गई तो उनके फोन स्विच आफ थे। यही हाल सदर विधायक राजकुमार यादव के फोनों का था। वे भी स्विच आफ थे। यहां तक कि दोनों ही सूचियों में शामिल करहल विधायक सोबरन सिंह का फोन भी बंद था। हालांकि इस संबंध में मुलायम सिंह की सूची में शामिल किशनी से सपा प्रत्याशी संध्या कठेरिया से फोन पर पूछा गया तो उन्होंने सिर्फ यही कह कर फोन काट दिया किय बड़ों की बातें हैं हमसे न पूछें। वहीं जिलाध्यक्ष मानिक चंद यादव ने कहा कि नेताजी का निर्णय पार्टी में रहने वाले सभी लोगों को मान्य होता है। पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी वही व्यक्ति है जिसका नाम नेताजी द्वारा जारी की गई सूची में शामिल है। अन्य कोई सूची पार्टी की ओर से मान्य नहीं है।
अखिलेश समर्थकों में छाई निराशा
मैनपुरी। मुख्यमंत्री अखिलेश और प्रो. रामगोपाल यादव के निष्कासन की सूचना के बाद जिले में उनके समर्थकों में निराशा छा गई। बता दे कि रामगोपाल का पार्टी से पहली बार निष्कासन होने के बाद से ही जिले में पार्टी दो फाड़ हो गई थी। शुक्रवार को हुए निष्कासन के बाद उक्त गुट एक बार फिर हाशिये पर पहुंच गया है।
उल्लेखनीय है कि रामगोपाल यादव को कुछ दिन पूर्व भी पार्टी से निष्कासित किया गया था। उसके बाद एमएलसी अरविंद यादव को भी पार्टी से निकाल दिया गया था। तभी से जिले में पार्टी दो फाड़ हो गई थी। सदर विधायक भी इसी गुट में शामिल रहे हैं। इस गुट पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का प्रभाव रहा है। शुक्रवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कड़ी कार्रवाई के बाद उक्त गुट के हाशिए पर चले जाने की आशंका बढ़ गई है। इसके साथ ही गुट में शामिल विभिन्न नेताओं के राजनीतिक भविष्य पर भी दांव लग गया है। हालांकि इस संबंध में कोई भी अभी कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं है। यही नहीं दोनों ही गुटों के नेताओं के अधिकांश समर्थक शुक्रवार सुबह से ही लखनऊ में डेरा डाले हुए हैं। दोनों ही गुटों के समर्थक अपने प्रत्याशियों के समर्थन में दबाव बनाने के लिए लखनऊ में ही डेरा जमाए हुए थे। वहीं शिवपाल समर्थक जिले के एक नेता ने कहा कि यदि रामगोपाल समर्थकों में दम है तो वे चुुनाव लड़कर दिखाएं। उन्हें पता चल जाएगा कि नेताजी और सपा से अलग होकर क्या होता है।