आजादी के लिए सन् 1857 की लड़ाई में जिले के किसानों ने थाना एलाऊ के गांव इलाबांस में अंग्रेजों का अन्न भंडार गोदाम लूटा था। युवाओं को साथ लेकर किसानों ंने लूटा हुआ अन्न आजादी के दीवानों को बांटा। किसानों की अगुवाई करने वाले दिहुली के जमींदार ठाकुर गंगा सिंह को लोग आज भी याद करते हैं। आजादी के आंदोलन में उनकी भूमिका तथा निर्भीकता की चर्चा क्षेत्र में आजादी की कहानियों में बढ़ चढ़कर सुनाई जाती हैं।
दिहुली के बुजुर्ग बताते हैं कि अंग्रेजों के साथ युद्ध में महाराजा तेज सिंह का साथ देने पर उनकी गढ़ी ध्वस्त कर दी गई। उनको अंग्रेजों ने गिरफ्तार भी किया मगर उन्होंने अंग्रेजों के सामने सिर नहीं झुकाया। जबकि युवाओं और किसानों ने अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध लड़ने निकली फौजों को भोजन-पानी की व्यवस्था कर जंग ए आजादी में अपना योगदान दिया।
मई 1857 में मेरठ विद्रोह के बाद मैनपुरी के महाराजा तेजसिंह ने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंक दिया। अंग्रेजों के खिलाफ मैनपुरी के किसान, युवा भी लामबंद होना शुरू हो गए। बरनाहल क्षेत्र के ग्राम दिहुली के जमींदार ठाकुर गंगा सिंह ने भी महाराजा तेज सिंह का साथ देने का संकल्प लेकर अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष शुरू कर दिया। मैनपुरी राज्य को मिली स्वतंत्रता में उनके योगदान को कम नहीं आंका जा सकता।
इतिहास की जानकारी रखने वाले कहते हैं कि जब अंग्रेजी फौजों ने मैनपुरी पर तीन ओर से एक साथ आक्रमण किया और महाराजा तेज सिंह को किला छोड़ना पड़ा, तब गंगा सिंह अंग्रेजी सैनिकों की पकड़ में आ गए। गिरफ्तारी के बाद उन्हें मानसिक एवं शारीरिक यातनाएं दी गईं। महाराजा तेज सिंह जब अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध लड़ रहे थे, तब किसान और युवा भी आजादी की लड़ाई में कूद पड़े। ग्राम इलाबांस में अंग्रेजों का विशाल अन्न भंडार गोदाम किसानों और युवाओं ने लूट लिया। गोदाम लुटने के बाद ही अंग्रेज मैनपुरी छोड़कर भागने को मजबूर हुए थे।
आजादी के इतिहास से पता चलता है कि जंग ए आजादी के दौरान जब जीटी रोड से देश को आजाद कराने का संकल्प लेकर फौजें दिल्ली की ओर कूंच कर रही थीं, तब जीटी रोड किनारे के ग्रामों के लोग फौजियों को भोजन-पानी की व्यवस्था करते थे। भोगांव से कुरावली तक प्रत्येक घर से भोजन के पैकेट एकत्रित कर फौजियों तक पहुंचाए जाते थे।