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यहां बदहाली का अंधेरा, वहां व्यवस्थाओं का उजियारा

Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
Anonymous User ब्यूराो अमर उजाला मैनपुरी
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मैनपुरी। बुधवार को हर तरफ हाईकोर्ट के आदेश ही चर्चा रही तो चिंतन और मनन भी परिषदीय विद्यालयों की दशाओं को लेकर हुआ। एक वो भी दौर था, जब इनका भी स्वर्णिम अतीत रहा है। इन्हीं स्कूलों से प्रारंभिक शिक्षा लेकर अफसर भी निकले हैं। सरकारी अफसर, जनप्रतिनिधि से लेकर आम आदमी तक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों के स्थान पर निजी और सीबीएसई बोर्ड के स्कूलों में ही पढ़ाना हैं। इन स्कूलों में पढ़ाने वाले टीचर भी अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाते हैं। उनकी यह चाहत यूं ही नहीं है। इसका कारण है दोनों स्कूलों में पढ़ाई और अन्य मिलने वाली सुविधाओं में होने वाला जमीन आसमान का अंतर। इस हकीकत को हमारे संवाददाता को जमीनी तहकीकात में भी देखा। सरकारी स्कूलों में जहां शिक्षकों को लापरवाही पर कोई कार्रवाई न होने का विश्वास था, वहीं निजी स्कूलों के शिक्षकों को लापरवाही पर कार्रवाई होने की चिंता थी। यही कारण है कि जहां सरकारी स्कूलों में पढ़ाई रसातल में पहुंच गई, वहीं निजी स्कूलों में शिक्षा का स्तर काफी बढ़िया है। हाल इतना बदतर है, तभी तो सरकारी स्कूलों में व्यवस्थाएं सुधारने के लिए हाईकोर्ट को दखल करना पड़ा।
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तस्वीर एक
 शहर के नजदीक स्थित रमईहार सरकारी स्कूल परिसर में चारों ओर गंदगी फैली हुई थी। न बच्चों को पढ़ने में ध्यान था और न ही शिक्षकों को पढ़ाने की चिंता थी। सभी का ध्यान सिर्फ मिड डे मील पर ही था। यहां 17 बच्चों पर पांच से अधिक शिक्षक तैनात हैं।
तस्वीर दो
 कुरावली रोड पर स्थित सीबीएसई बोर्ड के एक स्कूल का नजारा बिल्कुल ही अलग था। सुबह से ही वहां नियमित रूप से कक्षाएं लग रहीं थी। स्कूल परिसर और भवन भी साफ सुथरा और व्यवस्थित था। छात्र भी फुल यूनिफार्म में पढ़ने पर तल्लीन थे। जितना ध्यान बच्चे पढ़ने पर दे रहे थे उससे कहीं ज्यादा ध्यान शिक्षक बच्चों को पढ़ाने पर दे रहे थे।
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वेतन व अन्य सुविधाएं
 सरकारी स्कूल के शिक्षकों को लगभग 35-40 हजार रुपये माह वेतन मिलता है
सीबीएसई बोर्ड के निजी स्कूलों के शिक्षकों का वेतन 10-15 हजार रुपये है।
- निजी स्कूलों में छात्र संख्या 2000-4000 हजार के बीच है
- सरकारी स्कूलों में आमतौर पर 25 से 150 के बीच बच्चे ही पढ़ने आते हैं
सरकारी स्कूलों में थी शानदार पढ़ाई
मैनपुरी। एक बैंक में अधिकारी पद पर तैनात शरदचंद्र श्रीवास्तव का कहना है। कि मैं मैनपुरी में ही सरकारी स्कूल में ही पढ़ा था। उस समय शिक्षक प्रत्येक बच्चे पर विशेष ध्यान देता था। जो बच्चे पढ़ने में तेज होते थे उन्हें शाबाशी मिलती थी तो कमजोर बच्चों को भी पढ़ाने के लिए तवज्जो दी जाती थी। वर्तमान में अधिकांश अधिकारियों ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई सरकारी विद्यालयों से ही की है। अब तक शिक्षा व्यवसाय बन चुकी है। शिक्षकों का पढ़ाने से ज्यादा नेतागिरी में ध्यान रहता है।
कांशीराम मौर्य स्वास्थ्य शिक्षाधिकारी पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। इन्होंने घिरोर के सरकारी विद्यालय से प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की है। इनका कहना है कि पहले शिक्षा व्यवसाय नहीं थी। शिक्षक समाजसेवा के भाव से बच्चों को पढ़ाते थे। उनमें लालच नहीं था। अब शिक्षक पैसा कमाने की सोचते हैं। पढ़ाने का उनसे कोई नाता नहीं है। भ्रष्टाचार के चलते अधिकारियों का भी उन्हें कोई भय नहीं है।
परिषदीय ही नहीं यूपी बोर्ड के स्कूल भी बदहाल
जिले में परिषदीय ही नहीं यूपी बोर्ड के स्कूल तक बदहाल हैं। जीजीआईसी से लेकर एडेड स्कूलों तक का यही हाल है। न तो पूरा स्टाफ है और न ही भवन और साफ सफाई ही है। यही कारण है कि अभिभावक बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाना पसंद करते हैं। जबकि वहां पर फीस आदि काफी अधिक है।

- कोर्ट का निर्णय सराहनीय है। कोर्ट के निर्णय से निश्चित ही बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आएगा। साथ ही लूट मचा रहे निजी स्कूलों पर भी लगाम कसेगी।
                                                दीन मोहम्मद दीन
                                             राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता
हाईकोर्ट का निर्णय काफी अच्छा है। बेसिक शिक्षा में सुधार के सभी प्रयास अभी तक फेल हो चुके हैं। विभाग में भ्रष्टाचार चरम पर है। कोर्ट के निर्णय के बाद शिक्षा के स्तर में काफी सुधार आएगा।
                                                         डाक्टर पदम सिंह पदम
                                                       राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता

बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता काफी खराब है। इसका कारण शिक्षकों पर पढ़ाई के अतिरिक्त अन्य तमाम कामों का बोझ डालना है। इसके अलावा स्कूलों में शिक्षकों की कमी भी है। यही कारण है कि सक्षम व्यक्ति सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के स्थान पर निजी स्कूलों में पढ़ाना पसंद करते हैं
                                                      राजीव यादव
                                                     शिक्षक नेता
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