राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेशीय आव्हान पर बुधवार को सरकारी कार्यालयों में कामकाज प्रभावित हुआ। देहात से आए लोग पूरे दिन भटकते रहे। जिला कमेटी ने अस्पताल और तिकोनिया पार्क में धरना दिया। हड़ताल से अस्पताल की सेवाएं तीन घंटे तक चरमरा गईं। दवा लेेने तक के लिए मरीज भटकते रहे।
संयुक्त परिषद के सदस्य सुबह आठ बजे ही जिला अस्पताल पहुंच गए। अस्पताल की ओपीडी के बाहर धरना देकर सभा की। धरने में स्वास्थ्य कर्मचारी भी शामिल हुए। जिसके चलते दवा वितरण, खून की जांच, एक्स रे विभागों में काम नहीं हुआ। परिषद के जिलाध्यक्ष इंजीनियर यदुनाथ सिंह यादव ने कहा कर्मचारियों के इलाज में भ्रष्टाचार बंद किया जाए। कैशलेस सुविधा दी जाए। फील्ड कर्मचारियों की पूरे दिन की बाइक यात्रा का भत्ता दिया जाए। ठेकेदारी व्यवस्था समाप्त की जाए। मंत्री राजीव कुमार मिश्रा ने कहा हाईकोर्ट में तयशुदा सफाईकर्मी, संग्रह अमीन, लिपिक संवर्ग एवं कैशलेस चिकित्सा सुविधा पर आदेश जारी किया जाए। निगमों के घाटे के लिए जिम्मेदार तो अधिकारी हैं मगर वेतन कर्मचारियों का काटा जाता है इसको रोका जाए। नई पेंशन व्यवस्था को समाप्त कर पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू की जाए।
अस्पताल में सुबह 11 बजे तक धरना देने के बाद कर्मचारी कलक्ट्रेट के तिकोनिया पार्क पहुंच गए। वहां धरना देकर हुई सभा में अवधेश सिंह यादव ने कहा सरकार कर्मचारी विरोधी रवैया अपना रही है। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को दिया। इस मौके पर सुधीर दुबे, अनुपम दुबे, टीसी भारती, महेंद्र राठौर, अवधेश पाल, विकास गुप्ता, अवधेश चौहान, एमपी वर्मा, मानवेंद्र, अमर सिंह, राजेंद्र तनेजा, विनय यादव, ग्राम रोजगार सेवक संघ के अनिल यादव आदि मौजूद थे।
कार्यालयों में पसरा रहा सन्नाटा
मैनपुरी। हड़ताल के चलते विकास भवन के कई कार्यालयों में कामकाज प्रभावित हुआ। दूर दराज से आए लोग भटकते रहे। कई कार्यालयों के दरवाजे तक नहीं खुले तो कई में सन्नाटा छाया रहा। कार्यालयों के बाहर तथा लॉन में बैठकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बातें करते नजर आए। देहात से आए लोगों का कहना था कि कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर असहयोग का रवैया अपनाकर सरकार का विरोध कर सकते हैं मगर गांव से आने वालों की परेशानी को भी देखना चाहिए।
स्वास्थ्यकर्मियों से भिड़े मरीज
मैनपुरी। जिला अस्पताल में हड़ताल के चलते तीन घंटे तक स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गईं। दवा वितरण, एक्स-रे, खून की जांच के कमरे बंद होने से मरीज तथा तीमारदार आक्रोशित हो गए। उन्होंने अस्पताल परिसर में ही प्रदर्शन कर नारेबाजी की। स्वास्थ्यकर्मियों ने विरोध जताया तो मरीज और तीमारदार भिड़ गए। वहां मौजूद परिषद के नेताओं और सदस्यों ने बीच बचाव कर मरीजों और तीमारदारों को शांत कराया।
सर्वेश कुमार निवासी भावंत चौराहा का कहना है कि उनको तीन दिन से बुखार आ रहा है। वह दवा लेने अस्पताल गए थे लेकिन अस्पताल में हड़ताल के कारण उनको चार घंटे बाद ही दवा मिल सकी।
रतनेश कुमार निवासी इटौरा बुधवार को बाइक फिसलने से घायल हो गए थे। इलाज कराने के लिए वह अस्पताल गए। मलहम पट्टी वाला कमरा भी बंद था। उनको पट्टी बंधवाने के लिए ही तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा।
अर्चना कुमारी निवासी धारऊ को दो दिन पहले बुखार आया था। बुधवार को वह दवा लेेने गईं, बताया पहले तो डाक्टर ही कमरे में नहीं मिले। एक घंटे बाद डाक्टर आए तो दो घंटे तक दवा नहीं मिली। उनका बुखार तेज ही बना रहा।
सुखदेवी निवासी धौरासी संक्रामक रोग से पीड़ित चल रही हैं। बुधवार को वह अस्पताल आई। उनको पता ही नहीं था कि हड़ताल है। पैथोलॉजी बंद होने से उनकी खून की जांच नहीं हो सकी। तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा।