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शरीयत में बदलाव की गुंजाइश नहीं: अब्दुल रहमान

Thu, 08 Dec 2016 11:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
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शरीयत में बदलाव की गुंजाइश नहीं: अब्दुल रहमान - फोटो : अमर उजाला
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तीन तलाक पर कोर्ट ने जो फैसला सुनाया है। उस फैसले से मुस्लिम समाज सहमत नजर नहीं आ रहा है। उलमा और बुद्धिजीवियों का कहना है कि संविधान के तहत तो हम चलते ही हैं, लेकिन मजहबी कामों में शरीयत का कानून ही हमारे लिए मान्य है। यह कानून अल्लाह का बनाया हुआ कानून है।
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बड़ी खानकाह के सज्जादानशीं अब्दुल रहमान खां चिश्ती उर्फ बबलू मियां ने कहा कि मात्र कुछ औरतों की शिकायत पर तीन तलाक पर कोर्ट के फैसले से सहमत नहीं। तीन तलाक कानून सही है, लेकिन कुछ लोगाें द्वारा इसे तोड़ मरोड़कर गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। इसकी असलियत जानकर ही इस पर प्रश्न चिन्ह लगाना चाहिए। तीन तलाक के नियम भी अलग तरीके के हैं। मुस्लिम समुदाय में औरतों का इतना सम्मान है कि मां के कदमों में जन्नत कहा गया है। कुछ गलत लोगों द्वारा तीन तलाक के नाम पर भ्रमित किया जा रहा है जो कि गलत है। शरीयत में किसी भी तरह की बदलाव की गुंजाइश नहीं।
एडवोकेट एएच हाशमी ने कहा कि मुस्लिम शरीयत के हिसाब से चलता है। रही बात कानून की तो हम सभी कानून मानते हैं। तीन तलाक मामले में जो कोर्ट का फैसला आया है मुस्लिमों के हक में नहीं। शरीयत में किसी भी प्रकार का कोई संशोधन नहीं हो सकता। आज मुस्लिम समुदाय की औरतों की बड़ी चिंता हो रही है उस समय प्रधानमंत्री कहां थे जब गुजरात दंगो में मुस्लिम औरतों को खींचकर मारा जा रहा था।
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