कड़ाके की सर्दी और घने कोहरे में लोग ठिठुर रहे हैं। यातायात सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। वाहनों की रफ्तार थम चुकी है बावजूद इसके रोडवेज की बसों का अभी भी बुरा हाल है। वाइपर लगे और न फाग लाइट्स हैं। रात में घने कोहरे के बीच चालक अनुमान से गाड़ी चलाते हैं। कई हादसे भी हो चुके हैं।
पंद्रह दिन से पड़ रही सर्दी और कोहरे ने लोगों की दिनचर्या को प्रभावित किया है। सड़क हादसे भी हो रहे हैं। इसके बाद भी रोडवेज विभाग ने बसों में कोई व्यवस्था नहीं की है। अभी तक बसों में कोहरे के चलते लगने वाली फाग लाइट और फ्रंट ग्लास पर वाइपर तक नहीं लगाए हैं। यदि किसी बस में ड्राइवर साइड पर वाइपर लगा है तो कंडक्टर साइड पर नहीं है। इसके कारण कोहर में ड्राइवर को कंडक्टर साइड नहीं दिखती है। वहीं फाग लाइट न होने के कारण रात में कोहरे के समय गाड़ी चलाने में काफी परेशानी होती है। यही नहीं किसी किसी गाड़ी में तो विंडो के शीशे तक टूटे हुए हैं जिससे ठंडी हवा सीधे अंदर आती है। इस संबंध में बस स्टैंड पर खड़े यात्री अफाक ने बताया कि रोडवेज की बसों में यात्रा करते समय भी कड़ाके की सर्दी में पसीने छूट जाते हैं। कारण रात में कोहरे के चलते कुछ दिखाई ही नहीं देता। ड्राइवर अंदाजे से गाड़ी चलाता है। रोडवेज अधिकारियों को चाहिए की कोहरे के समय बसों में दोनों विंडो पर वाइपर और फाग लाइट तो लगवा दें।
रोडवेज बसों में आलवेदर लाइट लगाई गई हैं। यदि कोई बस छूट गई है तो उसमें भी उक्त लाइटें लगाई जाएंगी। वहीं खिड़कियों में शीशे और वाइपर लगाने का काम अभी चल रहा है।
- गोविंद सिंह, फोरमैन बेवर डीपो