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परिषदीय स्कूलों की परीक्षाओं में अव्यवस्थाएं

Thu, 12 Mar 2015 12:34 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला
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बुनियादी शिक्षा को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता पर है लेकिन विभागीय अव्यवस्था और खानापूर्ति शासन की मंशा पर पानी फेर रहे हैं। शिक्षा से लेकर परीक्षाओं तक में लापरवाही का आलम दिखा। बुनियादी शिक्षा के पहला दिन नकल भरा रहा, कापी से लेकर ब्लैक बोर्ड तक नकल का ‘राज’ रहा। कुछ ने कापी से देखकर लिखा तो कुछ ने ब्लैक बोर्ड से। इस तरह की खानापूर्ति और अव्यवस्थाओं के बीच परिषदीय विद्यालयों की परीक्षाएं शुरू हुईं।
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परीक्षाओं के दौरान अव्यवस्थाएं पूरी तरह से हावी रहीं। कक्षा एक से कक्षा पांच तक और कक्षा छह और आठ की वार्षिक परीक्षाएं हुईं। वहीं कई परिषदीय विद्यालयों में उत्तर पुस्तिकाओं से परीक्षा कराई गई। 1546 प्राथमिक और 554 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में लगभग 1.46 लाख बच्चे पंजीकृत हैं। परीक्षा दो पालियों में हुईं। प्रथम पाली में सुबह 10 बजे से लेकर 12:30 बजे तक कक्षा एक से पांच तक की विज्ञान परख और कक्षा छह से आठ तक की विज्ञान की परीक्षा हुई। वहीं द्वितीय पाली में सुबह 1:30 बजे से शाम चार बजे तक कक्षा छह से आठ तक की पृथ्वी हमारा जीवन विषय की परीक्षा हुई।

दृश्य एक
अवध नगर स्थित प्राथमिक विद्यालय पर सुबह की पाली में कक्षा पांच का विज्ञान का प्रश्नपत्र हुआ। यहां बच्चे एक साथ टाट पर बैठकर परीक्षा दे रहे थे।

दृश्य दो
आवास विकास स्थित प्राथमिक विद्यालय कक्षा पांच के बच्चों को विज्ञान का पेपर ब्लैक बोर्ड पर लिखकर हल कराया जा रहा था। साथ ही मात्र एक शिक्षिका कक्ष में थी। बाकी शिक्षक बाहर बैठे धूप ले रहे थे।
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दृश्य तीन
नगला पजावा स्थित प्राथमिक विद्यालय में बच्चे टाट पर बैठकर एक दूसरे की कापी से नकल कर रहे थे। इस दौरान परीक्षा कक्ष में एक भी शिक्षक नहीं था। शिक्षक बाहर बैठे बातें कर रहे थे।

दृश्य चार
भोगांव के पूर्व माध्यमिक विद्यालय छोटा बाजार में 10:30 बजे बच्चे झाड़ू लगा रहे थे। इसके चलते परीक्षा देरी से शुरू हो सकी। जबकि परीक्षा शुरू होने का समय 10:30 बजे है।

दृश्य पांच
भोगांव के प्राथमिक विद्यालय में पेपर ही नहीं पहुंच सके। इसके चलते शिक्षकों ने बच्चों को हाथ से लिखकर प्रश्नपत्र दिया। वहीं बच्चों ने एक  साथ बैठक प्रश्न हल करे।

ब्लैक बोर्ड पर प्रश्न हल कराया जा रहा है। ऐसा मामला उनके संज्ञान में नहीं है। परीक्षा का निरीक्षण किया जा रहा है। यदि ऐसा मिलता है तो शिक्षक के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। - प्रदीप कुमार, बीएसए
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