कहा कि वह पुलिस को बताता रहा कि उसने कोई अपराध नहीं किया। वह अपराधी नहीं है। लेकिन, उसकी सुनने वाला कोई नहीं था। जेल जाने के तीन दिन बाद न्यायालय से युवक को जमानत पर रिहा कर दिया गया। इसके बाद न्यायालय से वारंट संबंधी पत्रावली की पक्की नकल प्राप्त की।
इसके मिलने पर पता चला कि उसी नाम और वल्दियत का युवक नगला केहरी निवासी प्रदीप है। यह वारंट उसके नाम पर था। लेकिन, पुलिस ने उसे जेल भेज दिया। मामला सामने आया तो पुलिस के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई है। पुलिस अब सफाई दे रही है। कह रही है कि वारंट पर नाम और पता बेवर का ही दर्ज था, इसलिए गड़बड़ी हो गई।
जेल में काटी रातों की कैसे होगी भरपाई
पुलिस अब भले ही वारंट में पता गलत होने के चलते गड़बड़ी होने की बात कह रही है, लेकिन प्रदीप कुमार ने जो रातें बिना अपराध के जेल में काटी उनकी भरपाई कौन करेगा। इसका जवाब न तो पुलिस के पास है और न ही किसी अन्य के पास। प्रदीप कुमार का कहना है कि मामले की जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
थाना प्रभारी महाराज सिंह भाटी ने बताया कि युवक और अपराधी का नाम और पिता का नाम एक ही था। वारंट पर नगला केहरी के बजाए बेवर का पता दर्ज था। इसलिए ही पुलिस को समझने में गड़बड़ी हो गई। फिर भी मामले की जांच कराई जाएगी।