मैनपुरी। सरस्वती साधना परिषद के तत्वावधान में प्रेमचंद सक्सेना की स्मृति में विश्व हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर गोष्ठी का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पूर्व प्रधानाचार्य सत्यसेवक मिश्र ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया।
गोष्ठी में प्रधानाचार्य जेसी त्रिपाठी ने कहा कि हिंदी बचपन का पालना यौवन की फुलवाड़ी और बुढ़ापे की रामराम है। उन्होंने कहा कि हिंदी इंटरनेट पर सर्वाधिक प्रयोग की जाने वाली भाषा है। इसके विस्तार की संभावनाएं असीम हैं। मुख्य अतिथि ने कहा कि हिंदी भवन के निर्माण का कार्य शीघ्र पूरा करा दिया जाएगा। एके सिंह राठौर ने कहा कि हिंदी हमारी मातृ भाषा है। भारत के प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि इसका अधिक से अधिक प्रयोग करें। प्रधानाचार्य हर प्रसाद यादव ने कहा कि दुर्भाग्य है कि देश के लोग संपर्क के रूप में इसका प्रयोग कम कर रहे हैं। हिंदी का अधिक प्रयोग कर गर्व का अनुभव करें।
कार्यक्रम में श्रीकृष्म मिश्र ने कहा कि हिंदी को मातृभाषा मानकर इसके पठन पाठन और उपयोग की उपेक्षा कर रहे हैं। समाज के लोगों को हिंदी को विश्व भाषा बनाने के प्रयास करने चाहिए। इस अवसर पर नगर के अधिकांश हिंदी प्रेमी उपस्थित रहे। अंत में लोगों ने गोष्ठी के बाद नगर भ्रमण भी किया। इस दौरान वह देवी रोड, संताबसंता चौराहा, सिटी पोस्ट आफिस, घंटाघर होते हुए नगर पालिका परिषद पहुंचे। कार्यक्रम संचालन दीन मोहम्मद दीन व आशा सक्सेना ने किया। इस मौके पर लाखन सिंह भदौरिया, बदन सिंह मस्ताना, डाक्टर सूर्य मोहन, डाक्टर चंद्रमोहन, विनोद माहेश्वरी, पवन कुमार आदि मौजूद थे।