मूलभूत सुविधाएं पाने को जूझ रहे लोग
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प्रदेश सरकार और जन प्रतिनिधियों द्वारा किए गए विकास के दावों को अब ग्रामीण आइना दिखाने लगे हैं। बिजली, पानी, सड़क की समस्या ही मुख्य है। क्षेत्र में विकास कार्य नहीं कराने के चलते 26 गांव के लोग मतदान बहिष्कार का एलान कर रहे हैं। मतदान बहिष्कार के एलान के बाद अधिकारी और जनप्रतिनिधि ग्रामीणों को समझाने में लगे हुए हैं।
आज भी जिले में कई गांव ऐसे हैं जो बदहाली के शिकार हैं। इन गांवों में बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं का आज भी अभाव है। चुनाव की घोषणा होते ही विकास कार्य नहीं कराए जाने से नाराज ग्रामीण चुनाव के समय विकास के दावों को आइना दिखा रहे हैं। ग्रामीणों में चुने गए जन प्रतिनिधियों के साथ ही सरकार के प्रति भी गुस्सा नजर आ रहा है। अब तक विधानसभा क्षेत्र मैनपुरी में पांच, किशनी में सात, भोगांव में आठ, करहल में छह गांव के लोग विकास कार्य नहीं कराए जाने के विरोध में मतदान बहिष्कार का एलान करके गांव के बाहर काले बैनर और घरों पर काले झंडे टांग चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है जनप्रतिनिधियों ने जरूरत के आधार पर नहीं चहेतों को खुश करने के लिए उनके क्षेत्र में ही विकास कार्य कराए हैं। चुनाव के समय बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत समस्याओं को पूरा कराने का आश्वासन देने वाले नेता जीतने के बाद समाधान नहीं कराते हैं। मतदान बहिष्कार का एलान करने वाले गांवों में संबंधित एसडीएम सहित जन प्रतिनिधि ग्रामीणों को मतदान करने के लिए समझा रहे हैं। कई गांवों के लोग मतदान के लिए मान भी गए हैं।
मतदान बहिष्कार से समस्या का समाधान नहीं होगा। अधिक से अधिक मतदान करके अच्छा प्रतिनिधि चुनें। आचार संहिता के चलते बिजली, पानी, सड़क की समस्या का समाधान नहीं हो सकता है। चुनाव के बाद जरूरत के आधार पर विकास कार्य कराए जाएंगे।
चंद्रपाल सिंह, जिलाधिकारी