मैनपुरी। वित्तीय वर्ष की समाप्ति के चलते जहां सरकारी कार्यालयों में अफरा-तफरी का आलम रहा। वहीं ट्रेजरी में भी सुबह से लेकर देर रात तक बजट का पैसा आवंटित करने और बिल आदि जमा करने की होड़ सी लगी रही। अधिकारी और कर्मचारियों की व्यस्तता का आलम यह था कि उन्हें किसी से बात करने तक की फुर्सत नहीं थी। विभिन्न विभागों को आवंटित बजट के लिए के लिए बैंकों को पत्र लिखकर भेजने और विभागों से मिले बिल-वाउचर को फीड करने में कर्मचारियों के पसीने छूट रहे थे।
सोमवार का दिन ट्रेजरी के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं था। रविवार के अवकाश के दिन भी काम काज किया गया लेकिन सोमवार को सुबह नौ बजे से लेकर देर रात तक अधिकारी-कर्मचारी बजट आवंटित करने और विभिन्न विभागों के बिल-वाउचर कंप्यूटर में फीड करने में जुटे रहे। एक-एक विभाग से सौ से दो सौ बिल-वाउचर आने से कर्मचारियों को पसीना आ रहा था। वरिष्ठ कोषाधिकारी बृजेश कुमार ने बताया कि बजट आवंटित करने और बिल-वाउचर जमा करने का सिलसिला मंगलवार को भी जारी रहेगा। वहीं जिन विभागों को 31 मार्च को ही बजट आवंटित किया जाएगा उनके बिल-वाउचर डीएम के निर्देश पर अगले दो-तीन दिनों तक लिए जाएंगे।
ट्रेजरी कार्यालय में विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी बजट और बिल-वाउचर के सिलसिले में देर रात तक चक्कर काटते रहे। किसी को आवंटित बजट का बैंक के लिए पत्र जारी कराना था तो किसी को बिल-वाउचर जमा करने थे। देर शाम तक यह स्पष्ट नहीं हो सका कि किस विभाग का कितना पैसा खर्च होने से रह गया। लगातार बिल-वाउचर आने से ट्रेजरी के कर्मचारी चकरघिन्नी बने हुए थे।
देर रात तक सरकारी कार्यालय रहे गुलजार
सोमवार को सरकारी कार्यालय भी देर रात तक गुलजार रहे। वित्तीय वर्ष की समाप्ति के चलते अधिकारी क्लोजिंग कार्य में लगे रहे। बकाया बिलों का भुगतान और प्राप्त बजट को खर्च करने के लिए कागजी कार्रवाई होती रही। विकास भवन के डीआरडीए कार्यालय, समाज कल्याण, अल्पसंख्यक कार्यालय, पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय, लघु सिंचाई आदि कार्यालयों में अधिकारी-कर्मचारी फाइलों और बिल-पाउचरों में उलझे नजर आए। कलक्ट्रेट और पुलिस कार्यालय में भी देर रात तक कार्य चलता रहा।