जिले में 134 किलो मीटर के क्षेत्र में बहने वाली ईशन नदी आज अस्तित्व खो चुकी है। बीते 16 वर्षों में प्रशासन की ओर से बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में भवन और मकान बनाकर रहे लोगों को नोटिस भी जारी कर चुकी है, लेकिन अभी तक किसी पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
ईशन नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए प्रशासन की ओर से किए गए सभी प्रयास नाकाम साबित हुए हैं। कार्रवाई के नाम पर नोटिस जारी कर अभी तक केवल औपचारिकता ही निभाई गई है। बीते 16 वर्षों में ईशन नदी के समीप बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में बडे़ पैमाने पर अवैध निर्माण का सिलसिला लगातार जारी है। प्रशासन ने तीन बार 100 से अधिक भवन और गृह स्वामियों को नोटिस भी जारी किए लेकिन अनदेखी कहें या लाचारी अभी तक कार्रवाई के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ है। वर्ष 2002 में पुनर्रक्षित महायोजना में श्रीदेवी मेला से लेकर मदार गेट, आश्रम रोड से कचहरी रोड, महाराजा तेजसिंह चौराहा से दीवानी रोड का पूर्वी क्षेत्र, जेल तिराहा से ईशन नदी तक का क्षेत्र बाढ़ग्रस्त घोषित है। ईशन नदी के अस्तित्व बचाने में जुटी प्रयास संस्था के प्रयासों के चलते एक बार वर्ष 2013 में तत्कालीन डीएम विजय किरन आनंद ने 100 से अधिक लोगों को नोटिस जारी कर तोड़फोड़ भी कराई थी। कार्रवाई के बाद इस मामले पर राजनीति का शिकार होकर उनका तबादला गैर जनपद में कर दिया गया। इसके बाद अभी किसी ने भी इस ओर मुड़कर नहीं देखा। बीते तीन वर्षों की बात करें तो बडे़ पैमाने पर बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में अतिक्रमण हुआ है। इसे प्रशासन की अनदेखी ही कहा जा सकता है। जो खुलेआम भू-माफिया को ईशन नदी के अस्तित्व को खत्म करने को आमंत्रित कर रहा है।
ईशन नदी को अतिक्रमण से मुक्त कराने और उसके पुराने स्वरूप को वापस लाने के लिए पिछले एक दशक से प्रयास कर रहे हैं लेकिन अधिकारियों और भूमाफिया की मिली भगत के चलते नदी पर लगातार अतिक्रमण हो रहा है। इसके लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाने और जागरूकता लाने का प्रयास करना होगा। अन्यथा आने वाले दिनों में नदी अपने बचे हुए रूप को भी खो देगी।
विनय सोती, सामाजिक कार्यकर्ता
ईशन नदी शहरवासियों के लिए लाइफ लाइन है। एक समय यह पूरे जिले को पानी की आपूर्ति का मुख्य जरिया हुआ करती थी। हम लोगों की अनदेखी और उपेक्षा के चलते यह नदी अंतिम सांसें गिन रही है। जरूरी है कि हम लोग नदी को नया जीवन प्रदान करें। अन्यथा एक दिन हम लोग स्वयं के जीवन को बचाने के लिए जूझ रहे होंगे। जरूरी है कि अभी से लोगों और आने वाली पीढ़ी को जागरूक किया जाए। खाली बातों से कुछ नहीं होगा धरातल पर भी काम करने की जरूरत है।
अशोक यादव, शिक्षाविद