डीएम से मिलने पहुंचे भट्ठा संचालक
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कोसमा में पुलिस की पिटाई से दो युवकों दिलीप और पंकज की मौत के मामले में दर्ज हुई एफआईआर में एक और भट्ठा मालिक का नाम शामिल किया गया है। 36 घंटे बाद भी इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। डीआईजी आगरा भी मौके पर पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी की। तनाव के चलते कोसमा में पुलिस पीएसी तैनात कर दी गई है। एसपी देवरंजन ने बताया कि आरोपी पुलिसकर्मियों एवं अन्य लोगों की तलाश में आगरा, अलीगढ़, अमरोहा, गाजियाबाद आदि स्थानों पर टीमें भेजी गई हैं। उधर, भट्ठा मालिकों की नामजदगी के विरोध में भट्ठा स्वामियों का एक प्रतिनिधिमंडल शनिवार को डीआईजी से मिला और नामजदगी का विरोध किया।
पहले पुलिस दोनों युवकों की मौत डूबने से होने की बात कर रही थी। पोस्टमार्टम में उनकी मौत पिटाई से आई चोटों के कारण होने की बात सामने आई तो पुलिस ने चार पुलिस कर्मियों, दो होमगार्ड, दो भट्ठा संचालकों लालू वर्मा और प्रमोद दुबे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। ग्रामीणों और मृतकों के परिवारीजनों के दबाव के चलते शनिवार को पुलिस ने कोसमा चौराहे के पास स्थित भट्ठे के मालिक अरमान का नाम एफआईआर में शामिल किया गया। शुक्रवार को जाम के दौरान भी मृतक दिलीप का चचेरा भाई घटना में अरमान के शामिल होने का आरोप लगा रहा था। शुक्रवार देर रात पहुंचे डीआईजी शनिवार को दिनभर मैनपुरी में कैंप किए रहे।
उधर, भट्ठा मालिकों को नामजदगी की जानकारी हुई तो वे बड़ी संख्या में एकत्र होकर एसपी से मिलने पहुंचे। इसी बीच उन्हें डीआईजी के आने की जानकारी मिली। वह ट्रांजिट हास्टल में डीआईजी अजय मोहन शर्मा से मिले और उन्हें बताया कि पुलिस ने अपना अपराध छिपाने के लिए घटना में भट्ठा मालिकों को नामजद किया है।
यह है मामला
कोसमा चौकी पर तैनात पुलिसकर्मियों का शुक्रवार तड़के चार बजे गांव नीवरी सिरसागंज फीरोजाबाद से ट्रैक्टर ट्राली में ईंट लेकर आ रहे पांच युवकों से वसूली को लेकर विवाद हो गया था। पुलिस की पिटाई से पांच युवकों में से दो दिलीप और पंकज निवासी नीवरी की मौत हो गई थी। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने दोनों के शवों को तालाब में फेंक दिया था। इस घटना पर कोसमा में जमकर बवाल हुआ था। आठ घंटे तक लोगों ने कोसमा चौराहे पर जाम लगाए रखा था। पुलिस पर पथराव किया था, चौकी इंचार्ज और एक सिपाही के साथ मारपीट की गई थी।
मीडिया को रोका
मैनपुरी। शनिवार को डीआईजी, एसपी आदि ने कोसमा पहुंचकर मौके का निरीक्षण किया। उसके बाद ट्रांजिट हास्टल में डीआईजी कैंप किए रहे। इस दौरान मीडिया कर्मियों डीआईजी से मिलने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें नहीं मिलने दिया गया।