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Mainpuri News: अपनों का कांधा मिला न कफन....अंतिम सफर पर निकले वो कौन

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मैनपुरी। जिंदगीभर जीते रहे अपनों के लिए, कई बार आखिरी सफर में अपनों का कांधा नसीब होता है और न ही मौत पर दो आंसू बहाने वाला। जिले में पिछले आठ महीने में मिले 22 शवों में 15 लोगों की तमाम प्रयासों के बाद भी पहचान नहीं हो सकी। वह कौन थे, कहां के रहने वाले थे और मौत के मुहाने पर पहुंचने पर भी कोई अपना उनकी तलाश के लिए क्यों नहीं निकला, इन सवालों के जवाब अब शायद ही कभी मिल सकें मगर पुलिस ऐसे शवों का अंतिम संस्कार कराने के बाद उनके डीएनए के लिए नमूना जरूर रखती है, ताकि कभी कोई अपना ढूंढ़ते हुए पहुंचे तो पहचान कराने का प्रयास किया जा सके।
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जीवनभर इंसान तमाम रिश्तों से जुड़ा रहता है लेकिन मौत के बाद ये रिश्ते कितने बेबस हो जाते हैं, इसका अंदाजा इन 15 अज्ञात लोगों के अंतिम संस्कार से लगाया जा सकता है। एक जनवरी से 17 अगस्त 2026 के बीच विभिन्न थाना क्षेत्रों से पुलिस ने कुल 22 शव बरामद किए। इन सभी को जिला मुख्यालय स्थित मोर्चरी में रखकर पहचान के प्रयास शुरू किए गए लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद मात्र सात शवों की ही पहचान हो पाई। बाकी 15 शवों को पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद अंतिम संस्कार कराया।

लावारिस शव मिलने पर पुलिस की प्रक्रिया
लावारिस शव मिलते ही पुलिस सबसे पहले पंचनामा तैयार करती है। मृतक की शक्ल-सूरत, कपड़े, टैटू, या आसपास मिली वस्तुओं का ब्योरा दर्ज किया जाता है। साथ ही तस्वीरें और फिंगरप्रिंट लिए जाते हैं। यह जानकारी आसपास के थानों, नियंत्रण कक्ष, और सीसीटीएनएस पोर्टल पर साझा की जाती है। इसके अलावा लापता लोगों से संबंधित रिपोर्ट से भी मिलान किया जाता है। कानून के अनुसार 72 घंटे तक शिनाख्त के प्रयास चलते हैं। असफल होने पर पुलिस स्वयं शव का अंतिम संस्कार कराती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मौत के कारणों की भी जांच की जाती है।
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क्या सोच रहे होंगे उनके अपने...
लावारिस शवों को न पहचान मिली, न कोई अपना। अगर दूसरी तरफ देखें, तो दर्द और गहरा हो जाता है। शायद कितने परिवार आज भी अपने लापता सदस्यों के घर लौटने की आस में बैठे हों। किसी का पति, किसी की बहन, किसी की मां, उनकी आंखें आज भी अपनों को ढूंढ़ते-ढूंढ़ते थक चुकी होंगी। इन 15 अनजान मृतकों के पीछे कितने बिखरे हुए परिवार होंगे, यह अनुमान भी नहीं लगाया जा सकता।

शिनाख्त के हरसंभव प्रयास, फिर भी नाकामी
हर लावारिस शव की पहचान के लिए थाना स्तर पर पूरी कोशिश की गई। पड़ोसी थानों को सूचना, सोशल मीडिया पर पोस्ट और गांव-गांव पोस्टर लगाए गए लेकिन 7 मामलों में ही परिजन से संपर्क हो सका। जिन शवों की पहचान हुई, उनका पोस्टमार्टम कराकर कानूनी वारिसों को सौंप दिया गया।

समाजसेवियों ने निभाई मानवता की जिम्मेदारी
जब अपनों ने साथ नहीं दिया, तब शहर की समाजसेवी संस्थाओं ने आगे आकर इन 15 लावारिस शवों का धार्मिक विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया। इस मौके पर संबंधित थाना पुलिस भी मौजूद रही और पूरी गरिमा के साथ इन अनजान रूहों को विदाई दी गई।

डीएनए सैंपल सुरक्षित, ताकि भविष्य में हो सके पहचान
यदि कभी भविष्य में इन शवों की पहचान हो या कोई परिजन कपड़ों या फोटो के आधार पर दावा करने आए, तो इसकी संभावना को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने सभी लावारिस शवों के डीएनए सैंपल, दांत या हड्डी के अंश सुरक्षित रख लिए हैं। ताकि कानूनी प्रक्रिया में कभी भी इनका उपयोग हो सके।

वर्जन
अज्ञात शव मिलने पर उनकी पहचान के प्रयास किए जाते हैं। अज्ञात शवों का 72 घंटे बाद पोस्टमार्टम कराकर पुलिस द्वारा अंतिम संस्कार किया जाता है। भविष्य में पहचान को लेकर कपड़, बिसरा आदि को सुरक्षित रखा जाता है।
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-अभिषेक तिवारी, एसपी ग्रामीण
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