मैनपुरी। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए नेचुरल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग योजना 2025-26 से संचालित की जा रही है। इसके तहत विकासखंड मैनपुरी और सुल्तानगंज के 10-10 गांवों का चयन किया गया है। चयनित गांवों में चिह्नित किसान प्राकृतिक खेती करेंगे और बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत आदि प्राकृतिक निवेश का प्रयोग करेंगे। इससे भूमि की सेहत में सुधार के साथ किसानों को भी लाभ मिलेगा।
खेती में उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की सेहत खराब हो रही है और फसलें भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो रही हैं। फसलों और मिट्टी को नुकसान से बचाने के लिए कृषि विभाग प्राकृतिक खेती के लिए बढ़ावा दे रहा है। उप कृषि निदेशक नरेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि नेचुरल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग योजना 2025-26 के अंतर्गत प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को खरीफ में दो हजार रुपये और रबी में दो हजार रुपये प्रति एकड़ का अनुदान दिया जाएगा। जो किसान स्वयं प्राकृतिक निवेश तैयार नहीं कर सकेंगे, उन्हें जैव इनपुट संसाधन केंद्र (बीआरसी) के माध्यम से निवेश उपलब्ध कराया जाएगा।
-
दो ब्लॉक के 20 गांव चयनित
प्राकृतिक खेती के लिए करीमगंज, जसरऊ, उझैया फकीरपुर, अस्योली, जरामई, बरौली, हलपुरा, लहरा महुअन, सथिनी दलीपपुर और शिवसिंहपुर नबादा गांव चयनित हैं। वहीं सुल्तानगंज विकासखंड में सिवाई भदौरा, रूई सिनौरा, उद्यमपुर नरैनी, सहारा, हन्नूखेड़ा, आलीपुर पट्टी, मानिकपुर, पाल, ललूपुर और सुरजनपुर को योजना में शामिल किया गया है।
-
बीआरसी की स्थापना पर मिलेगी एक लाख की सहायता
वित्तीय वर्ष 2026-27 में जैव इनपुट संसाधन केंद्र (बीआरसी) की स्थापना एफपीओ, सहकारी समिति, स्वयं सहायता समूह या स्थानीय ग्रामीण उद्यमी कर सकेंगे। चयनित बीआरसी सदस्य को केंद्र स्थापित करने के लिए एक लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। बीआरसी सदस्य प्राकृतिक खेती के लिए बायोइनपुट तैयार करेंगे, स्वयं खेती में इस्तेमाल करेंगे और योजना से जुड़े किसानों को मांग के अनुसार उचित मूल्य पर उपलब्ध कराएंगे।