मैनपुरी में सोशल मीडिया के सार्थक इस्तेमाल और अपनी लगन से सास-बहू की जोड़ी ने कमाल कर दिखाया है। शहर के राधारमन रोड पर रहने वाली शुभा भटनागर और उनकी बहू मंजरी ने मिलकर केसर की खेती शुरू की। अब वे सालाना औसतन 3.5 किलो केसर का उत्पादन कर रही हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने 22 स्थानीय महिलाओं को भी इस पहल से जोड़कर रोजगार के अवसर पैदा किए हैं।
तीन साल पहले रघुवीर शीतगृह के स्वामी संजीव भटनागर की पत्नी शुभा भटनागर के मन में कुछ नया करने की जिज्ञासा जगी। एमए तक पढ़ीं शुभा को तकनीकी जानकारी कम थी, इसलिए उन्होंने अपनी बीई डिग्रीधारी बहू मंजरी की मदद ली। दोनों ने मिलकर गूगल पर केसर की खेती के तरीके खोजे।
कश्मीर से ली ट्रेनिंग, मैनपुरी में उगाया केसर
केसर की खेती के लिए विस्तृत जानकारी जुटाने के मकसद से शुभा और मंजरी साल 2023 में कश्मीर पहुंचीं। वहां उन्होंने एक सप्ताह किसानों से केसर उगाने के तौर-तरीकों की बारीकियां सीखीं। वापस लौटने के बाद 30 अगस्त 2023 को उन्होंने रघुवीर शीत गृह में 1200 स्क्वायर फुट के एक हॉल में केसर की खेती के लिए एक चैंबर तैयार किया और केसर का बीज बोया।
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उनकी मेहनत रंग लाई और नवंबर में उनकी पहली फसल तैयार हो गई। पहली बार में उन्हें सवा दो किलो केसर मिला, जिसे उन्होंने 750 रुपये प्रति ग्राम के हिसाब से बेचा। वर्तमान में वे सालाना औसतन 3.5 किलो केसर का उत्पादन कर रही हैं और उनकी केसर 899 रुपये प्रति ग्राम के हिसाब से पूरे भारत में सप्लाई हो रही है।
ई-कॉमर्स से देशभर में बिक्री, महिलाओं को सशक्तीकरण
शुभा और मंजरी बताती हैं कि वे अपनी केसर की बिक्री ई-कॉमर्स वेबसाइटों के जरिए पूरे भारत में करती हैं। ऑनलाइन ऑर्डर मिलने के बाद वे डिलीवरी भी ऑनलाइन ही करती हैं। इस पूरी प्रक्रिया में 22 महिलाएं उनके साथ जुड़ी हुई हैं, जो खेती की देखरेख करती हैं और उन्हें इसके लिए मेहनताना दिया जाता है। उनकी इस पहल को जून 2024 में दिल्ली में ‘एग्रीटेक स्टार्टअप ऑफ द ईयर’ पुरस्कार से भी नवाजा गया।