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माह ए रमजान का आगाज, पहला रोजा आज

Sat, 27 May 2017 11:26 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी।
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माह ए रमजान का आगाज, पहला रोजा आज - फोटो : अमर उजाला
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माह ए रमजान का दीदार शनिवार को हो गया है। जैसे ही लोगों को पता चला कि रमजान का चांद हो गया है तो एक दूसरे को मुबारकबाद देकर सहरी की तैयारियां शुरू कर दीं। बाद नमाज मगरिब इसके साथ ही शहर की मसजिदों में तरावीह पढ़ने का भी एलान कर दिया। इसके बाद तो मुस्लिम बस्तियों में जश्न का माहौल दिखाई देने लगा। मस्जिदों में तरावीर शुरू हो गई। आम दिनों की अपेक्षा मस्जिदों में कई गुना नमाजियों की भीड़ पहुंची।
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शुक्रवार को चांद की 29 तारीख होने की वजह से लोगों ने रमजान का चांद देखने की कोशिश की लेकिन कहीं भी चांद नहीं हुआ। शनिवार को लोगों ने बाद नमाज मगरिब चांद का दीदार किया। चांद दिखते ही लोगों ने एक दूसरे को रमजान के चांद की मुबारकबाद दी। दीदार ए चांद के बाद मस्जिदों से रविवार को पहला रोजा होने का एलान किया गया। चांद दिखने के बाद सबसे पहले सहरी की तैयारी की। किसी ने दूध फेनी खरीदी तो किसी ने खजला और अन्य। बाद नमाज इंशा के तरावीह शुरू हो गई। कई जगहों पर शबीना शुरू हो गए। गुड़ की मंडी स्थित

देर रात मुसलिम इलाकों में चहलपहल
माह ए रमजान शुरू हो गया। चांद दिखते ही मुस्लिम इलाकों में जश्न का माहौल देखा गया। लोगों ने अंडे, गोश्त, दूध, दही, चावल, खजला, दूधफेनी, ब्रेड आदि की खरीददारी की। महमूद नगर, मोहल्ला कटरा, गोला बाजार, सिकंदरपुर, टोला, करहल रोड आदि जगहों पर देर रात तक चहलपहल रही।
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जामा मस्जिद के पेश इमाम मोहम्मद शमी अहमद ने शहर के मुस्लिमों को मुकद्दस रमजान की मुबारकबाद देते हुए कहा कि रविवार पहला रोजा है। बाद नमाज इंशा मस्जिद में तरावीह शुरू कर दी गईं हैं। सभी लोग इस मुबारक महीने में ज्यादा से ज्यादा इबादत कर हर खास ओ आम के लिए दुआ करें।
खानकाह रशीदिया के सज्जादानशीं हाजी अब्दुल रमहान खां चिश्ती ने माह ए रमजान की मुबारकबाद देते हुए बताया कि सूफी मस्जिद में तरावीह शुरू हो गई हैं। वहीं दस दिन का शबीना सबीह मैदान में चलेगा।
    

रमजान का महीना बड़ी बरकतों का है
रोजा रखो पढ़ो कुरआन, आया है माहे रमजान
 इस्लाम मजहब का सबसे पाक महीना रमजान होता है। इसकी शुरूआत चांद के दीदार के साथ होती है। रमजान मुबारक का महीना मुस्लिम मजहब में खास अहमियत रखता है। इस पूरे माह रोजा रखते हैं और अल्लाह की इबादत करते हैं।

इस पाक महीने में रोजा रखने वाले रोजदार अल सुबह यानी सूरज की किरणें चमकने से पहले तक सहरी करके रोजे की नीयत करके रोजा रखते हैं, शाम को सूरज छिपने के बाद इफ्तार करते हैं। रोजा रखने के दौरान रोजदार पांचों वक्त की नमाज अदा करते हैं। इस माह को रहमतों और बरकतों का महीना माना जाता है। रमजान माह शुरू होने से एक दिन पहले रात तक मस्जिदों मेें तरावीह पढ़नी और कुरआन की तिलावत करना भी शुरू हो जाता है।

रमजान की अहमियत
खजूर वाली मस्जिद के इमाम हाफिज मोहम्मद इकरार ने बताया कि मजहब-ए- इस्लाम के पांच अरकनों में से रोजा भी एक रुकून है। यह वह महीना है जिसमें अल्लाह ताअला ने अपनी पाक किताब कुरान-ए-पाक को बंदों की रहनुमाई के लिए इस जहां में नाजिल किया। इस पाक माह में अल्लाह जन्नत के दरवाजे खोल देता है। एक नेकी के बदले अल्लाह 70 नेकियों का सवाब देता है। नफ्ल अदा करने पर फर्ज का सवाब मिलता है।

कैसे टूटता है रोजा
जामा मस्जिद के पेश इमाम मोहम्मद शमी अहमद ने बताया कि रोजा जानबूझकर खाने-पीने, बजू के दौरान हल्क में पानी चले जाने से टूट जाता है। रोजे की हालात में कुरान-ए-पाक की तिलावत, पांचों वक्त की नामज, दुरूद शरीफ पढ़ना बेहद जरूरी है। साथ ही झूठ, बुराई और लड़ाई से दूर रहना चाहिए। गरीबों, यतीमों और विधवाओं की मदद करनी चाहिए।

रोजा किस पर फर्ज है
12 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों के लिए रोजा रखना फर्ज है। इसके अलावा हर औरत, आदमी जो अक्लवाला और सेहतमंद हो उस पर साल में एक माह के रोजे रखना फर्ज है। बीमार लोग, गर्भवती औरत व मानसिक रूप से कमजोर पर रोजा फर्ज नहीं है। रोजा न रखने वाले अपने रब की नाफरमानी करते हैं।

इस बार 15 घंटे का रोजा पड़ रहा है। ऐसे में रोजेदारों को सहरी के वक्त सबसे ज्यादा पानी पीना चाहिए। साथ ही धूप में न निकलें। रोजा खोलने के बाद ग्लूकोज जरूर पिएं। गर्भवती महिलाएं और बीमार लोग रोजा न रखें। सिर्फ अल्लाह की इबादत करें
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                        डाक्टर नूर अहमद, फिजीशियन 
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