घर की कलह समाप्त होने और प्रदेश अध्यक्ष का पद संभालते ही शिवपाल सिंह यादव ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। अनुशासनहीनता की पहली गाज करहल निवासी एमएलसी अरविंद यादव पर गिरी है। उन पर कई गंभीर आरोप हैं। प्रोफेसर रामगोपाल यादव के भांजे अरविंद के खिलाफ की गई कार्रवाई से पार्टी में एक बार फिर घमासान होने के आसार नजर आ रहे हैं।
प्रदेश सरकार के कद्दावर मंत्री शिवपाल सिंह यादव को चार दिन तक चली उठापटक के बाद सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने प्रदेश अध्यक्ष के पद पर एक बार फिर ताजपोशी कर दी। इससे पहले परिवार की कलह के चलते शिवपाल ने सरकार और संगठन के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था। विधानसभा चुनाव घोषित होने से पूर्व शिवपाल सिंह ने जैसे ही प्रदेश अध्यक्ष का पद संभाला वैसे ही उन्होंने कड़े तेवर दिखाने शुरू किए। अनुशासनहीनता के दायरे में लाकर एमएलसी अरविंद यादव को पार्टी से निकाल दिया।
प्रोफेसर रामगोपाल यादव के भांजे होने के चलते उनकी पार्टी में एक अलग पहचान है। जिले में वैसे ही सपा कार्यकर्ता और नेता सैफई परिवार के नेताओं के बीच बंटे हुए हैं। जिले के कद्दावर नेताओं और जनप्रतिनिधियों को सैफई परिवार का अलग-अलग वरदहस्त प्राप्त है।
वहीं रविवार की शाम जैसे ही एमएलसी अरविंद यादव को छह साल के लिए पार्टी से निलंबित किए जाने की खबर समर्थकों को मिली वैसे ही करहल में कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। प्रधान, बीडीसी सदस्य सहित तमाम कार्यकर्ताओं ने बाजार में तथा एमएलसी के आवास पर एकत्रित होकर नारेबाजी की। उनका कहना था कि एमएलसी ने पार्टी की मजबूती के लिए हमेशा काम किया है। विद्वेष के चलते उनको पार्टी से निलंबित किया गया है। उनका निलंबन तत्काल वापस लिया जाए। अन्यथा की स्थिति में कार्यकर्ता अपने पदों से सामूहिक रूप से इस्तीफा देंगे। जिलाध्यक्ष खुमान सिंह वर्मा ने कहा कि अभी आधिकारिक तौर पर कोई पत्र नहीं आया है।
मेरे ऊपर लगे सभी आरोप गलत हैं और राजनीति से प्रेरित हैं। मुझ पर जो कार्रवाई हुई है वह प्रदेशाध्यक्ष की ओर से हुई है। उनका जो भी निर्णय है वह मान्य है। मैं हमेशा से सपा का समर्पित कार्यकर्ता रहा हूं और रहूंगा।
अरविंद यादव, एमएलसी समाजवादी पार्टी