दूध और पूत बिकते नहीं हैं...
गांव के लोगों का कहना है कि वैसे तो उन्हें सटीक तौर पर यह नहीं पता कि उनके किन पूर्वजों ने कब शपथ ली थी। मगर, उन्होंने बचपन से यही सुना है कि दूध और पूत (बेटा) बिकते नहीं हैं। अपने बड़ों से सुनी इस परंपरा पर इसलिए आज भी अडिग हैं। गांव के सेवक राम कहते हैं, हमारा धर्म कहता है कि दूध और पूत बेचे नहीं जाते। इसी उद्देश्य से हमारे गांव के लोग दूध नहीं बेचते। हम अपनी परंपरा पर अडिग हैं। गांव के सियाराम का मानना है, ग्रामीण अंचल में बच्चों के लिए दूध ही सबसे बड़ी ताकत है। इसलिए यह अच्छा भी है कि गांव में दूध न बेचा जाए। आज तक हमारे गांव में दूध नहीं बेचा गया।
सोनू यादव बताते हैं, हमारे पूर्वजों का संदेश है कि चाहे कुछ भी कर लेना लेकिन दूध बेचने की कोशिश मत करना। हम अपने पूर्वजों के संदेश को निभाने का काम कर रहे हैं। लालू यादव जैसे युवा भी इस परंपरा के प्रति प्रतिबद्ध हैं। उनका कहना है, गांव के सभी लोगों ने वर्षों पहले दूध न बेचने की शपथ ली थी। हम युवाओं की भी जिम्मेदारी है कि हम अपने पूर्वजों की उस शपथ को न टूटने दें।
फौजियों के गांव के नाम से है मशहूर
अंजनी गांव की पहचान फौजियों के गांव से भी है। इस गांव में सर्व जाति के लोग रहते हैं। जवानों को फौजी और पुलिस की नौकरी के बाद खेती का यहां मुख्य पेशा है।