हादसे में पल्लवी और गुड़िया भी घायल हो गईं थी। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद शाम को मां-बेटे और बेटी का शव गांव पहुंचा तो परिजन में चीखपुकार मच गई। विवाहित तीन बेटियां सहित सभी परिजन शवों से लिपट कर रोने लगे। बृहस्पतिवार दोपहर को तीनों शव खेत पर ले जाए गए। वहां एक पिता ने इकलौते बेटे और पुत्री को सीने से जुदा कर मिट्टी में दबा दिया और जीवन साथी रूबी की चिता को अग्नि दी। पत्नी व बच्चों को अंतिम विदाई देने के बाद वह अंत्येष्टि स्थल पर ही बैठा रहा।
कहानी सुनाने की जिद करता था दिलीप
पिता ब्रजेश छह बीघा खेत व पंचर की दुकान से जो भी कुछ कमाते थे, उसे बच्चों की बेहतर परवरिश में खर्च करते थे। थक हार कर जब घर आते थे, तब इकलौता बेटा दरवाजे पर इंतजार करता नजर आता था। पिता भी उसे देख कर दिन भर की थकान भूल जाते थे, रात होते ही सोने के समय पिता से कहानी सुनाने की मांग करता था। एक रात ने ब्रजेश का हंसता खेलता परिवार उजाड़ कर रख दिया।
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