मैनपुरी। सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय और कॉलेज में भेदभाव को रोकने के लिए यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन की ओर से जारी नए नियमों पर बृहस्पतिवार को रोक लगा दी। पिछले काफी समय से इन नियमों का कई संगठनों व सत्ताधारी दल के नेताओं की ओर से विरोध किया जा रहा था। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का सवर्ण समाज के नेताओं ने स्वागत किया है। वहीं, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि कोर्ट यह भी तय करें कि आगे इस तरह के कोई नियम नहीं बनाए जाएं।
कॉलेज और विश्वविद्यालय में भेदभाव रोकने के लिए यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन (यूजीसी) ने 13 जनवरी 2026 को नए नियम जारी किए थे। यह नियम इसी विषय पर 2012 में लागू किए गए नियमों की जगह जारी किए गए थे। इन नियमों के जारी होने के बाद देश में अलग-अलग स्थान पर प्रदर्शन शुरू हो गए। जनपद के सवर्ण संगठन अन्य संगठन भी यूजीसी के नियमों का जमकर विरोध करने लगे। यहां तक की भारतीय जनता पार्टी के कई पदाधिकारियों ने इन नियमों के विरोध में अपने पद से इस्तीफा तक दे दिया।
बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना ने यूजीसी के खिलाफ लोहिया पार्क में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया था। वहीं, बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए यूजीसी की ओर से जारी नियमों पर रोक लगा दी। ऐसे में नियमों का विरोध कर रहे तमाम संगठनों ने इस आदेश का स्वागत किया, उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट जल्द सुनवाई कर इन नियमों पर रोक लगाए। कोर्ट यह भी तय करे कि आगे ऐसे किसी भी तरह के नियमों को लागू नहीं किया जाए।
राष्ट्रीय राजपूत करणी सेवा के जिलाध्यक्ष शंकर सिंह भदौरिया अपने कार्यकर्ताओं के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि हम इन नियमों के खिलाफ अनशन की तैयारी कर चुके थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन पर रोक लगा दी है जिसका हम स्वागत करते हैं। वहीं, आगे अगर ऐसे किसी भी नियम को लागू किया गया तो हम सड़कों पर उतरकर इसका जमकर विरोध करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नियमों पर रोक लगा दी है ऐसा करना जरूरी था क्योंकि इनका विरोध बढ़ता जा रहा था। वहीं अभी हम पूर्ण रूप से संतुष्ट नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट को जल्द सुनवाई कर इन नियमों पर पूर्ण तरीके से रोक लगा देनी चाहिए।
विमल राठौर, जिला अध्यक्ष, श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना, एटा
सवर्ण समाज के साथ पहले से ही भेदभाव हो रहा है। उनको पहले से ही कई मामलों में दबाया जा रहा है। ऐसे में यूजीसी के नियम भी सवर्ण के खिलाफ हैं। इससे समाज के लोगों को अनावश्यक परेशान किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के रोक लगाने से हमें राहत जरूर मिलेगी।
आशीष चौहान, कार्यकर्ता