फोटो 24 भोगांव जामा मस्जिद में जुमे की नमाज अदा करते मुस्लिम समाज के लोग। संवाद
मैनपुरी। पाक माह रमजान का दूसरा दिन शुक्रवार को उत्साह और इबादत के साथ मनाया। रमजान के पहले जुमे पर जिलेभर की मस्जिदों में रोजेदारों ने अकीदत के साथ नमाज अदा की। इस दौरान खुदा से सभी के लिए सलामती और अमन-चैन की दुआएं मांगी गईं। बाजारों में भी रमजान को लेकर खास रौनक दिखाई दे रही है।शुक्रवार को रमजान के पहले जुमे पर शहर की आगरा सड़क स्थित बड़ी खानकाह सहित जिलेभर की सभी मस्जिदों में मुस्लिम पुरुषों ने नमाज अदा की। इसके बाद सभी ने देश और समाज में अमन-चैन और खुशहाली की दुआएं मांगीं। रोजेदार महिलाओं ने अपने घरों में ही जुमे की नमाज अदा की और परिवार व समाज की बेहतरी के लिए प्रार्थना की। शाम को कई स्थानों पर सामूहिक रूप से रोजेदारों ने इफ्तारी का आयोजन किया जिसमें सभी ने एक साथ रोजा खोला। यह आयोजन आपसी भाईचारे और सौहार्द का प्रतीक बना। बाजारों में भी रमजान की खरीदारी के लिए खूब चहल-पहल है। रोजेदार सहरी और इफ्तारी के लिए विभिन्न प्रकार की खाने-पीने की वस्तुओं की खरीदारी कर रहे हैं।
रमजान का महीना मुस्लिम समाज के लिए इबादत और बरकत का विशेष समय होता है। दूसरे दिन भी रोजेदारों ने पूरी शिद्दत के साथ रोजा रखा। पहले जुमे पर मस्जिदों में भारी संख्या में लोग नमाज अदा करने पहुंचे। नमाज के बाद खुदा से देश और दुनिया में शांति, समृद्धि और सलामती की दुआएं मांगी गईं।
बाजारों में रमजान की रौनक
रमजान के आगमन के साथ ही मैनपुरी के बाजारों में भी विशेष रौनक छा गई है। सहरी और इफ्तारी के लिए जरूरी सामानों की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है। रोजेदार विशेष रूप से सेवइयां, खजूर, विभिन्न प्रकार के फल और ड्राई फ्रूट्स की खरीदारी कर रहे हैं। इसके अलावा, इफ्तारी के लिए अन्य खाद्य पदार्थों की भी खूब बिक्री हो रही है। यह चहल-पहल पूरे रमजान माह में बनी रहने की उम्मीद है।
दिखावा नहीं, सादगी और हमदर्दी का महीना है रमजान: नूरीमैनपुरी। भोगांव जामा मस्जिद के इमाम मौलाना खालिद रजा नूरी ने रोजेदारों को अहम नसीहत देते हुए सोशल मीडिया पर इफ्तारी और सहरी की नुमाइश से बचने की अपील की है। उनका कहना है कि रमजान दिखावे का नहीं, बल्कि सादगी और हमदर्दी का महीना है, इसलिए इबादत को दिखावे से दूर रखा जाए। अल्लाह ने इस मुबारक महीने को तीन अशरों में तक्सीम किया है। इसके चलते पहला अशरा खुदा की रहमत वाला है। यह अशरा पहले रोजे शुरू होकर 10 वे रोजे तक चलता है। इस अशरे में खुदा की रहमत नाजिल होती है। इसलिए रोजेदार ज्यादा से ज्यादा इबादत कर इसका फैज हासिल करते हैं। संवाद