फोटो 23 दन्नाहार क्षेत्र के गांव में जानवरों का उपचार करते चिकित्सक। संवाद
दन्नाहार। दन्नाहार क्षेत्र के कई गांवों में खुरपका-मुंहपका रोग का प्रकोप बढ़ गया है। इसके कारण दुधारू पशुओं के दूध उत्पादन में भारी गिरावट आई है। हालांकि यह रोग आमतौर पर बरसात के मौसम में अधिक फैलता है, लेकिन इस बार सर्दी के मौसम में भी इसने क्षेत्र के कई गांवों को अपनी चपेट में ले लिया है।
दन्नाहार, दरवाह, नगला आशा, भटनी और हविलिया जैसे गांवों के पशुपालक इस रोग से जूझ रहे हैं। पशुपालकों का कहना है कि रोगग्रस्त पशुओं के दुग्ध उत्पादन में वृद्धि पूरी तरह रुक गई है जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ रहा है।
क्षेत्र में रोग के फैलने की जानकारी मिलने पर, घिरोर के पशु चिकित्सकों की टीम हरकत में आई है। टीम ने प्रभावित गांवों में पहुंचकर पशुओं का टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया है। पशु चिकित्साधिकारी घिरोर, जितेंद्र सिंह ने बताया कि खुरपका-मुंहपका एक अत्यंत संक्रामक रोग है जो हवा के माध्यम से एक पशु से दूसरे पशु में आसानी से फैल जाता है। उन्होंने पशुपालकों को सलाह दी है कि रोगग्रस्त पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें। बीमार पशुओं के चारे-पानी की व्यवस्था भी अलग ही की जानी चाहिए और बीमार पशुओं की ओर से इस्तेमाल किया गया चारा स्वस्थ पशुओं को नहीं खिलाना चाहिए।