मैनपुरी। जीएसटी विभाग ने व्यापारियों से सीधा संवाद स्थापित करने की कवायद शुरू कर दी है। इसी क्रम में बुधवार को अवध नगर चौराहा स्थित राज्य कर विभाग कार्यालय में जिला मंडी परिषद के पंजीकृत व्यापारियों और अधिवक्ताओं की बैठक बुलाई गई। बैठक में विभागीय अधिकारियों ने कर नियमों से जुड़ी अहम जानकारियां साझा कीं और भविष्य में हर सप्ताह ऐसे संवाद कार्यक्रम जारी रखने का ऐलान किया। कहा कि 50 हजार से ऊपर की सप्लाई पर ई-वे बिल अनिवार्य होगा।
व्यापारियों ने बैठक में बताया कि मंडी में फिलहाल मूंगफली और सरसों की सप्लाई पर ही जीएसटी लागू है, जबकि गल्ले और धान पर किसी प्रकार का कर नहीं है। मंडी खंड-3 मैनपुरी में पंजीकृत है और इसकी उप मंडियां भोगांव व करहल में संचालित हैं।
विभागीय अधिकारियों ने नियमों को लेकर व्यापारियों की शंकाओं का निवारण किया। उपायुक्त राधे श्याम ने स्पष्ट किया कि यदि कोई भी मोटर वाहन 50,000 रुपये से अधिक की कर योग्य माल ढुलाई करता है तो ई-वे बिल जनरेट करना अनिवार्य होगा। उन्होंने यह भी बताया कि जीएसटी एक्ट में ई-वे बिल के लिए दूरी का कोई न्यूनतम प्रावधान नहीं है, लिहाजा हर हाल में इसे लागू करना होगा। वहीं सहायक आयुक्त आलोक गौतम ने जानकारी दी कि मंडी में पंजीयन के लिए 7आर सर्टिफिकेट और आधार कार्ड की अनिवार्यता रहेगी।
उपायुक्त प्रशांत सक्सेना ने सख्त लहजे में कहा कि जीएसटी रिटर्न समय से दाखिल न करने वालों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इतना ही नहीं, जो व्यापारी निल रिटर्न दाखिल करते हैं, लेकिन उनके यहां कर योग्य माल की आवाजाही पाई जाती है, उनके खिलाफ भी सख्त कदम उठाए जाएंगे। कार्यक्रम के अंत में उपायुक्त वीरेंद्र नारायण वर्मा ने बताया कि आयुक्त राज्य कर के निर्देश पर मैनपुरी में अब प्रत्येक सप्ताह व्यापारियों और विभाग के बीच इसी तरह के संवाद कार्यक्रम आयोजित होते रहेंगे, ताकि कर नियमों की स्पष्टता के साथ अनुपालन भी बेहतर हो सके।