फोटो 24 महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल के जीरियाटिक वार्ड में भर्ती मरीज। संवाद
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मैनपुरी। महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल में चार साल पहले जीरियाट्रिक वार्ड की स्थापना कराई गई थी। वार्ड की स्थापना का उद्देश्य था कि 60 साल से अधिक उम्र के मरीजों को बेहतर उपचार दिया जा सके, लेकिन मरीजों का यह सपना चार साल बाद भी पूरा नहीं हो सका। यहां भर्ती बुजुर्ग मरीजों के लिए न तो अलग से डॉक्टर की तैनाती हो सकी और न ही व्यवस्थाओं का हाल सुधरा। यहां भर्ती मरीजों का जीवन स्टाफ नर्स के भरोसे ही रहता है।
महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल में 10 बेड का जीरियाट्रिक वार्ड स्थापित है। ओपीडी के साथ ही यहां मरीजों को भर्ती किए जाने की व्यवस्था है। उद्देश्य था कि बुजुर्ग मरीजों को सामान्य मरीजों से अलग रखकर अलग से बेहतर उपचार दिया जा सके। इसके लिए अलग से चिकित्सक की तैनाती का भी निर्णय था। चार साल बाद भी यहां डॉक्टर की तैनाती नहीं हो सकी। यहां भर्ती होने वाले मरीजों को सामान्य वार्ड की तरह से ओपीडी के अन्य डॉक्टरों से ही उपचार दिलाया जाता है। वार्ड की दूरी अधिक होने के कारण यहां के मरीज एकांत भी महसूस करते हैं। मरीजों के साथ रहने वाले तीमारदारों को भी एकांत होने के कारण डर सताता रहता है। यहां किसी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था भी नहीं है। जीरियाट्रिक वार्ड के लिए दवा आदि की अलग से कोई व्यवस्था नहीं की गई है। यहां भर्ती होने वाले मरीजों की देखभाल के लिए एक मात्र स्टाफ नर्स की तैनाती रहती है।
नहीं बिछ सकी ऑक्सीजन लाइन : बुजुर्ग मरीजों को गंभीर हालत में यहां भर्ती कराया जाता है जिन्हें ऑक्सीजन की जरूरत भी होती है। महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल में तीन-तीन ऑक्सीजन प्लांट हैं, लेकिन यहां आज तक ऑक्सीजन की लाइन नहीं बिछाई जा सकी। यहां भर्ती मरीजों को सिलिंडर से ही ऑक्सीजन देने की व्यवस्था है। संवाद