मैनपुरी। अमेरिका-भारत व्यापार समझौते को रद्द करने के मांग लेकर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) और अन्य संगठनों के सैंकड़ों किसानों ने बृहस्पतिवार को डिप्टी कलेक्टर को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान उन्होंने जिला मुख्यालय पर स्थित तिकोनिया पार्क में बैठकर प्रदर्शन भी किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका-भारत व्यापार समझौता किसान विरोधी है। इसे तत्काल रद्द कर देना चाहिए।
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिला अध्यक्ष मुकेश यादव ने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच हुए व्यापार समझौते को लेकर देश भर में किसान संगठन धरना-प्रदर्शन के माध्यम से इसे रद्द करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि हमने भी महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम ज्ञापन दिया है। कहा कि भारत-अमेरिका के बीच जो समझौता हुआ है। वह किसान विरोधी है। भारत की आत्मा गांव में बसती है, लेकिन जिस तरह से किसान विरोधी समझौता सामने आया है, उसमें सबसे बड़ा सवाल है कि क्या इसके लिए किसानों की सहमति ली गई।
उन्होंने कहा कि सस्ते विदेशी उपज से भारतीय किसान तबाह होंगे, अमेरिका की खेती भारी सब्सिडी पर आधारित, पूरी तरह मशीनीकृत और कॉर्पोरेट का मॉडल पर आधारित है। अगर भारत सोयाबीन, मक्का, गेहूं, डेयरी उत्पादन, दालों पर आयात शुल्क घटाता है तो सस्ती अमेरिकी फसल भारतीय मंडियों में आएंगी, इससे भारतीय किसान जो पहले से ही एमएसपी की लड़ाई लड़ रहा है, वह इस प्रतिस्पर्धा में कैसे टिकेगा।
महासचिव अनुज ने कहा कि भारत का डेयरी मॉडल छोटे और सीमांत किसानों पर आधारित, सहकारी व्यवस्था पर टिका हुआ है। आसानी से अमेरिकी डेयरी उत्पादों का प्रवेश होने से लाखों दुग्ध उत्पादक परिवार प्रभावित होंगे, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा आघात है। व्यापार संतुलन के नाम पर भारत के ऊपर कृषि सब्सिडी कम करने, सार्वजनिक खरीद प्रणाली को कमजोर करने का दावा होने से एमएसपी व्यवस्था, सार्वजनिक वितरण प्रणाली और खाद्य आत्मनिर्भरता पर प्रहार होगा।
इस दौरान राधेश्याम, संजीव प्रधान, घनश्याम दिवाकर, उदयवीर सिंह यादव, भुवनेश यादव, बैचेलाल राजपूत, राकेश कुमार आदि मौजूद रहे।