फोटो 11 नूतन चौहान, प्राधिकरण सचिव
मैनपुरी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव नूतन चौहान ने कहा कि समझौते का सबसे बड़ा माध्यम लोक अदालत है। लोक अदालत में मुकदमा निपटाने से वादकारी के धन और समय की बचत होती है। सबसे खास बात यह है कि लोक अदालत के निर्णय को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है। प्राधिकरण कार्यालय में सचिव बुधवार को पत्रकारों से वार्ता कर रही थी। उन्होंने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से जरूरतमंदों को निशुल्क सहायता दी जाती है। तहसील स्तर पर भी विधिक सेवा प्राधिकरण संबंधित तहसीलदार की देखरेख में काम कर रहा है। वादकारियों की सुविधा के लिए पैरालीगल वॉलंटियर काम करते हैं। जेल में निरुद्ध बंदियों को भी उनकी जरूरत के अनुसार निशुल्क वकील उपलब्ध कराए जाते हैं। प्राधिकरण द्वारा लोगों को जागरूक करने के लिए शिविर भी लगाए जाते हैं।उन्होंने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधीन सुलह एवं समझौता केंद्र भी काम कर रहा है। इसमें मध्यस्थों के द्वारा न्यायालयों से भेजे गए दंपती के विवाद के मामले समझौते के आधार पर निपटाए जाते हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का प्रयास रहता है कि अधिक से अधिक मामले समझौते से निपटाए जाएं ताकि न्यायालयों पर मुकदमों का बोझ कम हो सके।
समझौते के लिए मुकदमे सूचीबद्ध करें : राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए बुधवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव नूतन चौहान ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक की। बताया कि 9 मई को दीवानी न्यायालय में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन होगा।समझौते से मुकदमे के लिए सूचीबद्ध करके प्राधिकरण कार्यालय में भेजें। संबंधित लोगों को इसके लिए जागरूक भी करें। प्रदीप कुमार विकास विभाग, हेमेंद्र कुमार दूर संचार विभाग, सैयद मोहम्मद अहमद पुलिस विभाग, डॉ अनिल कुमार स्वास्थ्य विभाग, रामनरेश सिंचाई विभाग मौजूद रहे।