हिमाचल में ऊना और सिरमौर जिला में पहले से ही अभियान चल रहा है।
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान धरातल पर उतरता नजर नहीं आ रहा है। जागरूकता अभियान और गोष्ठियां भी अभियान को मजबूती नहीं दे पा रही हैं। खेलने-कूदने और पढ़ने की उम्र में किशोरियों की शादियां तक करा दी जा रही हैं। अभियान से जुड़े विभाग और अधिकारियों की उदासीनता के चलते बेटियों को उनका हक नहीं मिल पा रहा है।
बेटियों को शिक्षित और स्वस्थ बनाने के लिए शासन की महत्वाकांक्षी योजना ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ परवान नहीं चढ़ पा रही है। अभियान को सफल बनाने के लिए को जिम्मेदारी दी गई है। शासन के निर्देश के बाद भी बाल कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य विभाग अभियान की सफलता के लिए पहल नहीं कर रहे हैं। इतने दिनों में बाल संरक्षण समिति ने एक बाल विवाह रुकवाया है।
नाबालिग की रुकवाई शादी
मैनपुरी। थाना कोतवाली के गांव परोंख में मां-बाप ने एक किशोरी की शादी तय कर दी। बरात भी गांव पहुंच गई। जागरूक लोगों की शिकायत पर बाल संरक्षण अधिकारी अलका मिश्रा ने गांव जाकर न केवल शादी रुकवाई बल्कि अभिभावकों को किशोरी के बालिग होने तक नियमित रूप से कार्यालय में नाबालिग के बारे में सूचना देने के निर्देश दिए।
अशिक्षा पड़ रही भारी
मैनपुरी। अशिक्षा के चलते दन्नाहार क्षेत्र के एक गांव में फर्रुखाबाद की एक महिला ने अपनी बहन की नाबालिग बेटी को बेच दिया। किशोरी के मौसा-मौसी दोनों अशिक्षित हैं। कुछ दिन बाद मौका पाकर किशोरी कथित ससुराल से भाग निकली।
अभियान की सार्थकता के लिए बीएसए और सीएमओ को पत्र लिखे गए हैं। जागरूकता के लिए गोष्ठियां और कार्यक्रम किए जा रहे हैं। स्कूलों में भी शिविर लगाकर अभियान से लोगों को जोड़ा जा रहा है।
अलका मिश्रा, बाल संरक्षण अधिकारी
यह अभियान शासन की प्राथमिकता में है। बाल संरक्षण, शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त जिम्मेदारी है। सभी विभागों को निर्देश दिए जा चुके हैं। लापरवाही बरतने पर कार्रवाई होगी।
पीसी गुप्ता, जिलाधिकारी