स्वतंत्रता सेनानी पूर्व विधायक जगदीश नारायण त्रिपाठी की सादगी आज भी भोगांव क्षेत्र के लोगों को याद है। भोगांव विधानसभा सीट का विधानसभा में उन्होंने वर्ष 1967 में प्रतिनिधित्व किया। विधायक चुने जाने के बाद भी उनकी आपसी मेलजोल की आदत नहीं बदली। बेवर का शहीद मेला आज भी उनकी याद दिलाता है।
कसबा बेवर के रहने वाले जगदीश नारायण त्रिपाठी ने आजादी की लड़ाई में 1942 के आंदोलन में छात्र नेता के रूप में भाग लेकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ बिगुल छेड़ा। धुन के पक्के जगदीश नारायण ने 1942 में बेवर थाने पर अपने साथियों के साथ तिरंगा फहराया था। कम्युनिस्ट विचारधारा से प्रभावित होकर उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्यता ली। 1962 में विधानसभा का चुनाव लड़ा। चुनाव हारने के बाद भी वह जनता से जुड़े रहे। वर्ष 1967 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भोगांव विधानसभा सीट से जीत हासिल की। वर्ष 1974 के चुनाव में उन्होंने दोबारा विजय हासिल की। पूरा चुनाव साइकिल से ही लड़ा। वह पैदल ही कसबे में लोगों के बीच पहुंचकर समस्याएं सुनते थे। विधानसभा क्षेत्र में किसी भी समर्थक की परेशानी पता चलते ही वह साइकिल से उसके घर पहुंचकर समस्या का समाधान कराने के लिए अधिकारियों से भिड़ जाते थे। विधायक बनने के बाद भी लखनऊ में पार्टी कार्यालय में ही रुकते थे। परिवारीजनों को विधायकी का रुतवा दिखाने से हमेशा रोकते थे। पूर्व विधायक केे भतीजे राज त्रिपाठी बताते हैं ताऊ जी ने पूरा चुनाव सादगी से लड़ा था। साइकिल लेकर अपना चुनाव चिन्ह हंसिया साइकिल के हैंडल पर टांगकर प्रचार करते थे। गर्मी के सीजन में हुए चुनाव में खेतों में कटाई कर रहे लोगों को हंसिया की याद दिलाना नहीं भूलते थे।
किसानों के साथ खेते में ही कलेऊ (सुबह का नाश्ता) करके उनका दिल जीत लेते थे। परिवारवाद के विरोधी रहे ताऊ जी प्रचार में भी परिवार के लोगों को साथ नहीं रखते थे। विधायक चुने जाने के बाद उनको मिला गनर दूसरी साइकिल पर चलता था।