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हत्यारे को फांसी: जज बोले- इसने राक्षसी कृत्य किया है... इसे जीने का अधिकार नहीं, अपराध सुन आप भी कांप जाएंगे

Wed, 14 Aug 2024 11:14 AM IST
भूपेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी

सार

मैनपुरी में कोर्ट ने हत्यारे को फांसी की सजा सुनाई। जज ने आदेश में लिखा कि इसने राक्षसी कृत्य किया है। इसे जीने का अधिकार नहीं है। दोषी ने पांच लोगों को जिंदा जला दिया था।
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कोर्ट फैसला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में दंपती सहित पांच को जिंदा जलाने वाले मुरारी कश्यप को मंगलवार को दोपहर दो बजे दीवानी हवालात से जिला जज के न्यायालय में पुलिस की सुरक्षा में पेश किया गया। डेढ़ घंटे तक लगातार कठघरे में खड़ा रहा। जिला जज सुधीर कुमार ने आदेश में लिखा है कि अभियुक्त ने एक राक्षसी कृत्य किया है। ऐसे व्यक्ति को समाज में जीने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने फांसी की सजा सुनाई। 

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जगदीश प्रजापति और मुरारी कश्यप के बीच वर्ष 2020 में होली पर गांव में लगाए गए डीजे पर नाचने को लेकर विवाद हो गया था। उस समय गांव के लोगों ने विवाद शांत करा दिया था। इसके बाद दोनों के बीच बातचीत बंद हो गई। मुरारी ने कई बार जगदीश को पूरे परिवार का सफाया करने की गांव में खुलेआम धमकी दी। 

यह बात पुलिस की विवेचना में सामने आई थी। लंच के बाद डायस पर बैठे जिला जज सुधीर कुमार ने अभियोजन और बचाव पक्ष के वकीलों की बहस सुनीं। शाम 3.30 बजे जिला जज ने मुरारी को मृत्यु दंड की जैसे ही सजा सुनाई वह भौचक्का रह गया। वह कठघरे में ही सिर पकड़कर बैठ गया।

माधौनगर खरपरी के के रहने वाले मुरारी ने 18 जून 2020 की रात 12 बजे जगदीश प्रजापति के भाई रामबहादुर, रामबहादुर की पत्नी सरलादेवी, पुत्री संध्या उर्फ रोहिनी, शिखा और पौत्र रिषी को कमरे की कुंडी बाहर से बंद करके मिट्टी का तेल डालकर आग लगाकर जिंदा जला दिया था। रिषी की जिला अस्पताल में तथा शेष सभी की सैफई अस्पताल में मौत हुई थी। 

जगदीश द्वारा दर्ज कराई गई रिपोर्ट के बाद पुलिस ने मुरारी को जेल भेजकर चार्जशीट कोर्ट में भेजी थी। जिला जज सुधीर कुमार ने नौ अगस्त को मुरारी को दंपती सहित पांच लोगों की जलाकर हत्या करने में दोषी पाकर जेल भेजा था। मृत्यु दंड की सजा होने के बाद उसको कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत से जेल भेज दिया गया।

जेल में रहकर लड़ा पूरा मुकदमा

सनसनीखेज वारदात के आरोपी मुरारी को पुलिस ने पकड़कर जेल भेज दिया। उसकी किसी भी अदालत से जमानत मंजूर नहीं हुई। उसको पूरा मुकदमा जेल में रहकर ही लड़ना पड़ा। शुक्रवार को उसको दोषी पाकर अदालत से ही जेल भेजा गया। मंगलवार को उसको मृत्यु दंड की सजा सुनाई गई है।
 

दिल दहलाने वाली है घटना

डीजीसी पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि घटना दिल दहलाने वाली है। एक मासूम जिसने दुनिया नहीं देखी थी। उसकी जलाकर हत्या करना गंभीरतम अपराध है। उसके लिए मृत्यु दंड की सजा भी कम ही है। उसके लिए सहानुभूति का स्थान नहीं है। मुरारी को मृत्यु दंड की सजा ही दी जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि दंपती सहित पांच लोगों की जिंदा जलाकर हत्या करने वाले को मृत्यु दंड मिलने से पीड़ित परिवार को कुछ तो सांत्वना मिल ही जाएगी।

मुरारी ने किया है राक्षसी कृत्य

जिला जज सुधीर कुमार ने आदेश में लिखा है कि अभियुक्त ने एक राक्षसी कृत्य किया है। जिसको एक सामान्य व्यक्ति सोच भी नहीं सकता। इससे स्पष्ट होता है कि अभियुक्त एक संवेदनहीन व्यक्ति है। जिसमें मानव के प्रति कोई दयाभाव नहीं है। ऐसे व्यक्ति को समाज में जीने का कोई अधिकार नहीं है। अभियुक्त का अपराध विरल से विरलतम अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसी स्थिति में अभियुक्त को मृत्यु दंड दिया जाना न्याय संगत है।

जिला जज ने टिप्पणी में लिखा है कि मृतकों में पति, पत्नी, दो पुत्रियां 16 और 18 वर्ष, दो साल का अबोध बालक शामिल है। हो सकता है कि अभियुक्त मुरारी की मृतक रामबहादुर से कोई दुश्मनी रही हो। परंतु उसकी दो पुत्रियों और दो वर्षीय अबोध बालक से कोई दुश्मनी नहीं थी। फिर भी अभियुक्त द्वारा उसकी निर्मम हत्या कर दी गई। 

जब किसी व्यक्ति के शरीर कोई सूक्ष्म अंग जल जाता है तो उससे असहनीय पीड़ा होती है। ऐसी स्थिति में मृतकों को जलने में कितनी पीड़ा हुई होगी उसकी कल्पना नहीं की जा सकती। अभियुक्त द्वारा मृतकों के परिवार के अन्य व्यक्तियों को भी मारने का प्रयास किया गया था। उनकी किस्मत अच्छी थी कि वे बच गए।

अंतिम सांस तक फांसी पर लटकाया जाए

जिला जज सुधीर कुमार ने मृत्यु दंड के आदेश में लिखा है कि मुरारी को तब तक फांसी पर लटकाया जाए। जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए। आदेश का क्रियान्वयन उच्च न्यायालय की पुष्टि के बाद ही किया जाए। इस संबंध में उच्च न्यायालय को पत्र भी लिखा जाए।
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17 गवाहों ने दी गवाही

पुलिस ने मामले की विवेचना करके 46 गवाहों की सूची न्यायालय में पेश की थी। अपराध की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट मुहर्रिर योगेश तोमर ने 17 गवाहों को नोटिस के माध्यम से न्यायालय में पेश किया। सभी गवाहों ने मुरारी के खिलाफ न्यायालय में गवाही दी। गवाही से ही दंपती सहित पांच को जलाने की पुष्टि हुई।
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