ईशन नदी में बारिश के मौसम में हर साल करीब 20 हजार हेक्टेयर भूमि जलमग्न होती है। इसका कारण नदी में पर्याप्त मात्रा में पानी न लेने की कमी और आसपास के क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण भी है। पूर्व में करीब सौ से अधिक लोगों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ है। नहर विभाग की ओर से अब इस समस्या से निपटने के लिए कार्य शुरू करा दिया गया है। 15 दिन में ईशन और अरिंद नदी की साफ सफाई का कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
जिले की ईशन नदी के आसपास बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में कृषि और अवैध निर्माण का कार्य चल रहा है। कई लोग सालों से इस भूमि पर खेती कर रहे हैं। लेकिन बीते कई दशकों से अक्सर बारिश के मौसम में उनकी खेती जलमग्न हो जाती है। इसका कारण बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में हो रहा अवैध निर्माण और नदी के पानी लेने की क्षमता का प्रभावित होना बताया गया है। प्रयास संस्था के अध्यक्ष विनय सोती के मुताबिक खेती का कार्य पहले भी होता था। लेकिन तब नदी गहरी थी। धीरे धीरे अवैध निर्माण, नदी में गंदगी फेंके जाने और बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में अनाधिकृत कब्जों के चलते नदी का तल क्षेत्र प्रभावित हुआ है।
इस वजह से प्रतिवर्ष 20 हजार हेक्टेयर भूमि जलमग्न होती है।
खरीफ और रबी की फसलों को नुकसान होता है। वहीं नहर विभाग की ओर से ईशन नदी और अरिंद नदी में सफाई के लिए कार्य शुरू किया जा चुका है। जिले की सीमाओं से गुजरने वाली दोनों ही नदियों की सिल्ट सफाई, चौड़ीकरण का कार्य आखिरी पड़ाव पर है। अधिशासी अभियंता की मानें तो 15 दिनों में कार्य पूरा होने की उम्मीद है। बारिश आने से पहले कार्य पूरा कर लिया जाएगा। नदी की गहराई का कार्य भी जेसीबी से कराया गया है। जिससे नदी अधिक पानी ले सके और आसपास के क्षेत्र में जलभराव की स्थिति न हो सके। उन्होंने बताया कि नदियों की साफ सफाई के लिए विभाग की ओर से 33 करोड़ का प्रस्ताव भेजा है। लेकिन अभी तक धनराशि विभाग को प्राप्त नहीं हुई है।
विभाग की ओर से ईशन नदी की साफ-सफाई और चौड़ीकरण का कार्य कराया जा रहा है। ऐसी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए चौड़ीकरण और नदी की गहराई पर भी ध्यान दिया जा रहा है। नदी के आसपास अवैध निर्माण और खेती से संबंधित कार्य को रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्हें वहां खेती की परमीशन किसने दी, भवन निर्माण के लिए परमीशन कैसे मिली। ये अधिकारियों के लिए जांच का विषय है।
- गोपाल जी यादव, अधिशासी अधिकारी नहर विभाग
नदी के आसपास बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में अवैध निर्माण के संबंध में जानकारी मिली है। प्रशासन करीब तीन वर्ष पूर्व एक सैकड़ा से अधिक लोगों को नोटिस जारी कर चुका है। बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में खेती की परमीशन मिलने और भवन निर्माण मंजूरी के संबंध में जांच की जाएगी।
- राकेश मालपाणी, एडीएम