अनियमित दिनचर्या, बदलता खानपान, भागदौड़ भरी जीवनशैली से उपजा तनाव यानी दिल पर दबाव बढ़ रहा है तो उसकी धड़कने भी बढ़ रही हैं। दिल कमजोर पड़ रहा है और रोग भी बढ़ रहा है। रक्तचाप और मधुमेह भी इस बीमारी को और बढ़ा रहे हैं। हृदय रोगियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। गांव और छोटे शहरों से भी बड़ी संख्या में रोगी सामने आ रहे हैं। दूसरी ओर, जिले में चिकित्सक न होने से रोगियों को परेशानी हो रही है।
जिला अस्पताल में प्रतिदिन 15 से 20 हृदय रोगी पहुंच रहे हैं। पहले अधिकांश हृदय रोगी 60 वर्ष से अधिक उम्र के होते थे। अब तो 35 वर्ष के लोग भी इस रोग की चपेट में आ रहे हैं। जिला अस्पताल के हृदय रोग विभाग में 12 वर्ष पूर्व टीएमटी मशीन स्थापित की गई थी। टीएमटी मशीन तो आ गई लेकिन उसके लिए विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है। टीएमटी जांच के लिए रोगियों को बाहर को ही जाना पड़ता है। यही नहीं पेसमेकर, आईसीयू सुविधा भी है। फिर रोगियों की गंभीर हालत देखते हुए आगरा या सैफई अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल में वर्तमान में सिर्फ ईसीजी ही हो पाती है।
महिलाओं के लिए सुझाव
- खानपान में प्रोटीन युक्त चीजों की अधिकता, फलों और सब्जियों का अधिक उपयोग, फेट और कैलोरी का सेवन कम करें। आउट डोर गेम्स को अधिक समय दें।
हृदय रोग के लक्षण
- छाती में समय-समय पर दर्द होना
- श्वांस लेने में तकलीफ महसूस होना
- थोड़ा चलने पर घबराहट महसूस होना
- लगातार तनाव का बने रहना
ऐसे करें बचाव
- व्यायाम करें, दौड़ लगाएं, योग करें, तनाव से दूर रहें, तला भुना कम खाएं, भोजन में नमक का कम सेवन करें, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज पर कंट्रोल रखें, धूम्रपान न करें
जिले में हृदय रोगियों की संख्या बढ़ रही है। 40 वर्ष की आयु के बाद लोगों के सीने में दर्द, अधिक घबराहट आदि होने पर ईसीजी अवश्य कराकर कुशल चिकित्सक को दिखाना चाहिए।
डाक्टर जेजे राम, फिजीशियन, जिला अस्पताल मैनपुरी