यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं जनवरी से शुरू होने की संभावना है। रही हैं। उससे पूर्व प्रैक्टीकल कराए जाने हैं, लेकिन जिले के तमाम वित्तविहीन कालेज ऐसे हैं जहां लैब के नाम पर सिर्फ लकीर पीटी गई है। ऐसे में इन कालेजों में इंटर के प्रैक्टीकल कैसे होंगे। इस बात को लेकर विद्यार्थी भी परेशान हैं।
जिले में 37 शासकीय और 349 वित्तविहीन इंटरमीडिएट और हाईस्कूल हैं। एडेड विद्यालयों में तो लैब संचालित हैं, लेकिन वित्तविहीन विद्यालय ऐसे हैं जहां लैब तो दूर मानक ही पूरे नहीं हैं। जनवरी तक इंटर और हाईस्कूल के प्रैक्टीकल होना अनिवार्य है। सूत्रों की माने तो अभी तक 66 विद्यालयों की लैब ऐसी हैं जहां सामान आदि तक पूरा नहीं है। ऐसे में इन विद्यालयों में प्रैक्टीकल के नाम पर लकीर पीटी जाएगी। बता दें कि कई कालेज संचालक ऐसे हैं जो परीक्षा लेने आए परीक्षकों से सांठगांठ कर लेते हैं। ताकि अपने परीक्षार्थियों को मनचाहे नंबर दिला सकें ।
वहीं सूत्रों की माने तो प्रैक्टीकल के नाम पर छात्रों से वसूली भी की जाती है। प्रत्येक छात्र से सौ से दो सौ रुपये तक वसूले जाते हैं। जिन्हें एकत्रित करके परीक्षकों को थमा दिया जाता है। वहीं कुछ खातिरदारी करने के लिए अपने पास बचाकर रख लेते हैं। प्रैक्टीकल पास आ जाने पर एडेड विद्यालयों में भौतिक, रसायन और जीव विज्ञान की सामग्री एकत्रित कराई जा रही है। ताकि प्रैक्टीकल के दौरान छात्र-छात्राओं को परेशानी का सामना न करना पड़े।
प्रैक्टीकल की डेट आने से पहले ही सभी कालेज संचालकों को लैब आदि सही कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही ऐसे कालेजों का निरीक्षण किया जा रहा है जहां लैब और उपकरण नहीं हैं। उन्हें कालेज संचालकों को शीघ्र ही सामग्री उपलब्ध कराने को कहा गया है।
आरपी यादव, डीआईओएस, मैनपुरी