जिले के स्कूलों में भी मिड-डे मील का हाल बुरा है। सफाई और उसकी गुणवत्ता का ध्यान ही नहीं रखा जाता है। लकड़ी के चूल्हे पर भोजन बनता है। खाना भी खुला रहता है।
मथुरा में गुरुवार को मिड-डे मील का दूध पीकर दो बच्चों की मौत के मामले ने सभी जगह मिड-डे मील की गुणवत्ता पर सवाल उठा दिया है। कई स्कूलों में लकड़ी के चूल्हे पर भोजन बन रहा है। वहीं शिक्षक खाद्यान्न का रखरखाव भी सही नहीं करते हैं। इसके चलते कई स्कूलों में रखे खाद्यान्न में कीड़े नजर आ रहे हैं। इसका खुलासा अभी कुछ दिन पूर्व ही डीसी एमडीएम के निरीक्षण में हुआ है।
गुरुवार को इन स्कूलों के मिड-डे मील और रसोई का हाल देखा तो खराब नजर आया। प्राथमिक विद्यालय बेरियाहार में खाद्य तेल में गंदगी नजर आई। रसोइघर में धूल-मिट्टी जमी मिली। साथ ही बर्तन भी काफी गंदे मिले। वहीं पूर्व माध्यमिक विद्यालय गोलाबाजार में बच्चों के लिए चूल्हे पर भोजन बनाया जा रहा था। डीसी एमडीएम नितिन भार्गव ने बताया कि वह लगातार एमडीएम की व्यवस्था परखने के लिए निरीक्षण कर रहे हैं। कमी मिलने पर कार्रवाई के लिए आलाधिकारियों को आख्या भेजी जा रही है।