मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती हैं। बावजूद इसके जिले में इनकी रोकथाम के लिए प्रभावी इंतजाम नहीं हैं। मलेरिया विभाग में जरूरत का स्टाफ भी नहीं है। ऐेसे में मलेरिया, डेंगू पर अंकुश भी लगे तो कैसे।
जिला मलेरिया अधिकारी का पद ही खाली है। बेसिक हेल्थ वर्कर्स के 88 पद हैं, तैनाती मात्र चार की है। सहायक मलेरिया अधिकारी के दो पदों में से एक पर ही तैनाती है। एसएमआई का एक पद है वह भी रिक्त है। एमआई के दो पदों में से एक रिक्त है। मैकेनिक का पद भी रिक्त है। स्वास्थ्य विभाग को कीटनाशक के रूप में तीन वर्ष से केवल डीडीटी ही मिल रहा है। यह भी शहरी क्षेत्र में छिड़का नहीं गया है। मई माह से विभिन्न सरकारी अस्पतालों में 911 मलेरिया रोगियों की ही जांच कराई गई। इनमें से मलेरिया पीवी के छह रोगी निकले। जिला चिकित्सालय में केवल मलेरिया स्लाइड टेस्ट की व्यवस्था ही है। चिकित्सक प्राइवेट पैथोलॉजी में एंटीजन और कार्ड टेस्ट कराने की अधिक सलाह देते हैं। ऐसे में रोगियों की सटीक संख्या का विभाग के पास कोई आंकड़ा नहीं है।
गंभीर मलेरिया के लक्षण
- तेज ज्वर, व्यवहार में परिवर्तन, (ऐंठन के दौरे)
- चेतना शून्यता, चलने, बैठने, बोलने या लोगों की पहचान करने में असमर्थता
- बार-बार उल्टी करना, दवा -खाना खाने या पानी पीने में असमर्थता
- मूत्र का कम आना या या फिर काला मूत्र आना
- वजन में अचानक कमी, ढीली त्वचा, आंखों का धंसना, रक्त अल्पता
- नाक, मसूड़ों व अन्य स्थानों से अकारण अत्यधिक रक्तस्राव होना
बचाव:
- मच्छरदानी एवं कीटनाशकों का प्रयोग करें
- घरों के आसपास जलभराव न होने दें
- बुखार आने पर तत्काल मलेरिया की जांच कराएं
- मलेरिया की पुष्टि पर तत्काल कुशल चिकित्सक से उपचार लें
- बीमारी का खुद ही उपचार करने से बचें
वर्जन
अस्पतालों में डीडीटी उपलब्ध कराकर छिड़काव के निर्देश संबंधित चिकित्साधिकारियों को दिए गए हैं। स्टाफ और संसाधनों के लिए शासन को लिखा गया है। अन्य कीटनाशकों की भी मांग की गई है। अभी मलेरिया रोगियों की संख्या काफी कम है। मंडल में एक ही कीट विशेषज्ञ होता है, जरूरत पर आगरा से कीट विशेषज्ञ बुलाया जाता है। जनपद की नौ पीएचसी, चार सीएचसी और जिला अस्पताल में मलेरिया जांच की सुविधा उपलब्ध है। यहां जांच के लिए मलेरिया और डेंगू की किट उपलब्ध कराई गई हैं।
एसएन सिंह, प्रभारी जिला मलेरिया अधिकारी