ज्योंति। शिव मंदिर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा से पूर्व कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा में शामिल महिलाएं सिर पर कलश लेकर भजन-कीर्तन करती हुईं चल रही थीं। बैंड कलाकारों द्वारा बजाई जा रही धार्मिक धुनों पर कई श्रद्धालु थिरकते हुए चल रहे थे। विभिन्न मार्गों से भ्रमण करती हुई कलश यात्रा कथा स्थल पर पहुंची। यहां विधिविधान से कलश स्थापित कराकर कथावाचक नारदानंद सरस्वती ने प्रवचन किए।
मंगलवार को शिव मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद कलश यात्रा का शुभारंभ हुआ। कलश यात्रा में सबसे आगे बैंड कलाकार धार्मिक धुनें बजाते हुए चल रहे थे। इसके पीछे 101 महिलाएं एवं युवतियां सिर पर कलश रख कर भजन कीर्तन करती हुईं चल रही थीं। यात्रा में शामिल कई श्रद्धालु धार्मिक धुनों पर थिरक रहे थे। परीक्षित मुन्नी लाल शाक्य श्रीमद्भागवत पुराण सिर पर रखकर चल रहे थे। कलश यात्रा मेन मार्केट, शीतला देवी मंदिर, खुड़िया, गमा देवी मंदिर होती हुई शिव मंदिर स्थित कथास्थल पर पहुंची। कथास्थल पर कथावाचक नारदानंद सरस्वती ने विधि विधान से कलशों की स्थापना कराई। कथा के पहले दिन उन्होंने प्रवचन करते हुए कहा कि ईश्वर की आराधना से बड़ा दुनियां में कोई सुख नहीं है। ईश्वर की प्राप्ति के लिए सत्संग जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि इसी प्रकार से जगह-जगह सत्संग होते रहें तो लोगों के बीच एक बार फिर आपसी प्रेम और सौहार्द कायम हो सकता है। कलश यात्रा में चेयरमैन ऊषा देवी, संतोष बाबू, जैन प्रकाश गुप्ता, शिव कैलाश गुप्ता, गिरीश बाबू शाक्य, चक्रधारी शाक्य, रामानंद, मुकेश कुमार, मनोज गुप्ता, कल्याणवती, मेघा गुप्ता, शशि देवी, फूलश्री, रामबेटी आदि शामिल थे।